बुल मार्केट को परिभाषित करना

बुल मार्केट का उपयोग एक ऐसी स्थिति को समाहित करने के लिए किया जाता है जिसमें एक वित्तीय बाजार कीमतों में वृद्धि का गवाह होता है या उनका जिनके बढ़ने की उम्मीद है। अधिकतर, इस शब्द का उपयोग शेयर मार्केट के संदर्भ में किया जाता है, हालांकि, इसका उपयोग किसी भी प्रतिभूति के संदर्भ में किया जा सकता है जिसका कारोबार किया जाता है। उदाहरण के लिए, बांड, मुद्राएं, कमोडिटीज और अचल संपत्ति, इनमें से  प्रत्येक में “बुल मार्केट” शब्द लागू हो सकता है।

इस तथ्य के कारण कि ट्रेडिंग के समय इन प्रतिभूतियों की कीमत लगातार बढ़ती और गिरती रहती है, शब्द बुल मार्केट आमतौर पर लंबी अवधि के लिए लागू होता है, जिसके दौरान किसी दिए गए प्रकार की  प्रतिभूति की कीमतों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बढ़ रहा होता है। इसलिए, बुल मार्केट यदि वर्षों के लिए नहीं तो महीनों के लिए अस्तित्व में रह सकते हैं।

यह समझना कि बुल मार्केट में क्या आवश्यक है

बुल मार्केट उस आशावाद से पहचाने जाते हैं जिसमें निवेशक अपने निवेश में विश्वास रखते हैं और एक ऐसा विश्वास रहता है कि शानदार परिणाम लंबे समय तक मिलते रहेंगे। सटीक रूप से लगातार यह भविष्यवाणी करना कि बाजार पर हावी रहने वाले रुझान कब बदल सकते हैं, आसान नहीं है। इस दुविधा को यह तथ्य और भी बढ़ा देता है कि मनोवैज्ञानिक प्रभाव और अटकलें बाजारों को एक बड़े स्तर पर प्रभावित कर सकती हैं।

हालांकि कोई प्रचलित नियम नहीं है जो यह तय करे कि बुल मार्केट की पहचान कैसे की जा सकती है, आमतौर पर बुल मार्केट उन परिस्थितियों में  पहचाने जाने योग्य और परिभाषित किया जा सकता है जिनमें स्टॉक की कीमतें 20 प्रतिशत बढ़ जाती हैं। यह वृद्धि आमतौर पर 20 प्रतिशत की गिरावट के बाद होती है और इसके बाद 20 प्रतिशत की दूसरी गिरावट आती है।

इस तथ्य के कारण कि बुल मार्केट की भविष्यवाणी करना मुश्किल है, विश्लेषक आम तौर पर इस घटना के होने के बाद ही एक बुल मार्केट की घोषणा करते हैं।

यह प्रदर्शित करना कि एक बुल मार्केट की विशेषता क्या है

एक बुल मार्केट की निम्नलिखित विशेषताएं होती हैं।

एक बुल मार्केट को पहले से ही मजबूत अर्थव्यवस्था न होने पर वृद्धि चिन्हित करती है।

वे आमतौर पर एक मजबूत सकल घरेलू उत्पाद (या जीडीपी (GDP)) और बेरोजगारी की घटती दरों की स्थितियों के अनुरूप होते हैं।

अधिक बार नहीं तो, एक बुल मार्केट उस समय मौजूद होगा, जिस समय कॉर्पोरेट मुनाफे में वृद्धि हुई है।

एक बुल मार्केट के दौरान परिणामस्वरुप निवेशक के विश्वास में भी वृद्धि होती है।

बुल मार्केट के दौरान स्टॉक की मांग समग्र रूप से सकारात्मक होने के साथ-साथ मार्केट  के सामान्य स्वर के सकारात्मक होने पर सकारात्मक होगी।

बुल मार्केट सक्रिय होने के उदाहरणों के दौरान आईपीओ (IPO) गतिविधि भी बढ़ जाती है।

प्रतिभूतियों में आपूर्ति और मांग के स्तर एक दुसरे के बिलकुल विपरीत होंगे, जिसमें पहला कमज़ोर होगा, जबकि बाद वाला मजबूत होगा।

बुल मार्केट में ऐसे निवेशक होते हैं जो प्रतिभूतियों को बेचने के बजाय उनका लाभ उठाने के लिए उत्सुक रहते हैं।

इसके अलावा, यही निवेशक बाजार में भाग लेने के विचार के लिए अधिक उत्तरदायी होते हैं, ताकि वे लाभ प्राप्त कर सकें।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जबकि इनमें से कुछ कारकों की गणना करना आसान है, अन्य की गणना करना आसान नहीं हैं। उदाहरण के लिए कॉर्पोरेट मुनाफे और बेरोजगारी को ले लीजिए, जिसकी बाजार के सामान्य स्वर की तुलना में आसानी से गणना की जा सकती है, जिसे उतनी ही आसानी से मापा नहीं जा सकता।

बुल मार्केट का अधिकतम लाभ उठाना

एक बुल मार्केट से लाभ प्राप्त करने के इच्छुक निवेशकों को जल्दी खरीदारी करनी चाहिए ताकि वे कीमतों में वृद्धि का लाभ उठा सकें और उनके चरम पर पहुंचने के बाद उन्हें बेच सकें। हालांकि यह पता लगाना कठिन है कि कीमत अपने निम्न स्तर और चरम पर कब पहुंचेगी, इस समय अधिकांश नुकसान आमतौर पर न्यूनतम होते हैं और केवल एक अस्थायी समय सीमा तक ही रहते हैं।

बुल मार्केट के दौरान निवेशकों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली अधिक प्रमुख रणनीतियों को समझने के लिए आगे पढ़ें। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इन रणनीतियों में इस तथ्य के कारण जोखिम का स्तर शामिल रहता है कि बाजार की वर्तमान स्थिति का आकलन करना मुश्किल है।

खरीदें और पकड़ बनाए रखें – यह रणनीति भविष्य में संभावित रूप से इसे बेचने के लिए दी गई प्रतिभूति को  खरीदकर और उस पर पकड़ बनाए रख कर काम करती है। इस उम्मीद में कि इसकी कीमत में वृद्धि होगी, निवेशकों को किसी प्रतिभूति पर पकड़ बनाए रखने के लिए अच्छे-खासे विशवास की आवश्यकता होती है। आशावाद जो बुल मार्केट्स की विशेषता है, इस दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।

बढ़ी हुई खरीद और पकड़ – यह रणनीति पिछली रणनीति के एक बदलाव के रूप में काम करती है। इसके द्वारा तय किया गया जोखिम ही इसे अलग बनाता है। इस रणनीति के तहत, निवेशकों को किसी दी गई प्रतिभूति में अपनी होल्डिंग्स में वृद्धि जारी रखनी चाहिए, जब तक कि प्रतिभूति की कीमत बढती रहती है। एक तरीका जिसके अनुसार निवेशक ऐसा करते हैं, वह शेयरों की एक तय अतिरिक्त मात्रा खरीदना है और जो हर बार स्टॉक की कीमत पूर्व-निर्धारित राशि से बढ़ने पर होती है।

रिट्रेसमेंट एडिशन – रिट्रेसमेंट का मतलब एक न्यूनतम समय सीमा से है जिसके दौरान एक प्रतिभूति की कीमत में सामान्य ट्रेंड बदल जाता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एक बुल मार्केट के मौजूद होने पर भी, स्टॉक की कीमतों में केवल वृद्धि होने की संभावना नहीं होती है। इसके बजाय, इसके कम समय सीमा तक मौजूद रहने की संभावना होती है, जिसके दौरान इन शेयरों की कीमतों में समग्र वृद्धि के ट्रेंड के बावजूद मामूली गिरावट आती है। कुछ निवेशक उस समय खरीदारी करते हैं जब ये थोड़े समय के लिए गिरावट होती है। वह विचार जिस पर यह रणनीति आधारित है वह यह है कि बुल मार्केट का अस्तित्व बना रहता है, विचाराधीन प्रतिभूति की कीमत इसकी गिरावट से उबरकर फिर से बढ़ना शुरू कर देगी, जिससे उसके निवेशकों को निवेशकों को खरीद की रियायती कीमत मिल जाएगी।

फुल स्विंग ट्रेडिंग – बुल मार्केट का लाभ उठाने के अधिक आक्रामक तरीकों में से एक के रूप में मौजूद, वे निवेशक जो फुल स्विंग ट्रेडिंग का इस्तेमाल करते हैं, बहुत सक्रिय भूमिकाओं में रहते हैं। वे अपने लाभ में वृद्धि करने के लिए अन्य तकनीकों के अलावा शॉर्ट-सेलिंग का उपयोग करते हैं क्योंकि बड़े बुल मार्केट के संदर्भ में बदलाव होते हैं।

निष्कर्ष

आशावाद और यदि वर्ष नहीं तो कई महीनों की विशेषता वाले बुल मार्केट निवेशकों में विश्वास जगाते हैं और मांग में वृद्धि और प्रतिभूतियों की कीमत में वृद्धि का गवाह बनते हैं।