कमोडिटी ट्रेडिंग का अवलोकन

कमोडिटी ट्रेडिंग, वैश्विक ट्रेड प्रणाली की बुनियादों में से एक है जिसके अंतर्गत, उत्पादन के लिए ब्लॉक के रूप में कार्य करने वाले प्राथमिक आर्थिक क्षेत्रों से विभिन्न वस्तुओं का ट्रेडट्रेड करता है।। ये कच्चे माल मानकीकृत और इनकी अन्य वस्तुओं के साथ अदला-बदली की जा सकती है। जिन निवेशकों का उद्देश्य अपने पोर्टफोलियो को विविधता प्रदान होता है, कमोडिटी डेरिवेटिव मार्केट उनको रिटर्न को बढ़ाने के लिए व्यापक एक्सपोजर प्रदान करता है। लेकिन कमोडिटी मार्केट में ट्रेडिंग शुरू करने से पहले, कमोडिटी ट्रेडिंग की मूलभूत तथ्यों को समझना आवश्यक होता है।

भारत में कमोडिटी ट्रेडिंग विभिन्न एक्सचेंज में, अत्यधिक विकसित और नियमित कमोडिटी ट्रेडिंग मार्केट में की जाती है।

कमोडिटी ट्रेडिंग क्या होती है?

कमोडिटी मार्केट एक विशाल बाज़ार होता है, जिसमें विभिन्न प्रकार के कच्चे माल या प्राथमिक उत्पादों की ट्रेडिंग की जाती है। दुनियाँ भर में लगभग 50 प्रमुख कमोडिटी मार्केट हैं जिनमें 100 से अधिक कमोडिटीज की ट्रेडिंग की जाती है। कमोडिटी ट्रेडिंग निवेशक को निवेश योग्य एसेट्स के रूप में कमोडिटी के संपर्क में आने की सुविधा प्रदान करता है। यह ट्रेडिंग विभिन्न एक्सचेंज में विनियमित बाजार में होती है। सामान्य निवेशकों के लिए, कमोडिटी डेरिवेटिव मार्केट कमोडिटी मार्केट में निवेश करने का सबसे अच्छा तरीका है। सामान्यतः, बाजार में जिन वस्तुओं की ट्रेडिंग की जाती है, उन्हें ट्रेडतीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है।

  • कृषि(कुछ उदाहरण, चना, सोया, फलियाँ, जीरा, चावल और रबड़ हैं)
  • धातुएं(एल्यूमिनियम, तांबा और सीसा जैसे औद्योगिक धातुएं और सोना और चांदी जैसे कीमती धातुएं)
  • ऊर्जा(प्राकृतिक गैस, कच्चा तेल और कोयला)

कमोडिटी ट्रेडिंग पारंपरिक प्रतिभूतियों से भिन्न, पोर्टफोलियो विविधता प्रदान करता है, । और चूंकि कमोडिटी के मूल्य शेयरों के मूल्यों के विपरीत दिशा में चलते हैं,   इसलिए जब मार्केट में अस्थिरता होती है तो निवेशक कमोडिटी ट्रेडिंग में भाग लेते हैं।

कमोडिटी ट्रेडिंग की शुरुआत कैसे  करें?

कमोडिटी ट्रेडिंग शुरुआत करना नौसीखिया ट्रेडर्स  के साथ-साथ अनुभवी ट्रेडर्स के लिए भी कठिन हो सकता है। ऐसा इससे उत्पन्न   चुनौतियों के विशिष्ट सेट के कारण  होता है। अगर इसे सही तरीके से किया जाता है, तो कमोडिटी ट्रेडिंग महत्वपूर्ण रिटर्न उत्पन्न करता है, जिसने कई निवेशकों को बाजार में आने के लिए प्रोत्साहित किया है। लेकिन जोखिम की मात्रा स्टॉक में ट्रेडिंग के समान ही होती है। कमोडिटी ट्रेडिंग में मूल्यों के परिवर्तन के आधार पर कमोडिटी खरीदना और बेचना शामिल है। इसकी शुरूआत करने के लिए चरणबद्ध निर्देश निम्नवत दिये गए हैं।

मार्केट की समझ: किसी भी व्यक्ति के लिए निवेश शुरू करने से पहले, कमोडिटी ट्रेडिंग मार्केट की बुनियादी बातों को समझना आवश्यक है। भारत में छह प्रमुख कमोडिटी ट्रेडिंग एक्सचेंज कार्यरत हैं, जैसे,

  • नेशनलमल्टी कमोडिटी एक्सचेंज इंडिया (NMCI)
  • नेशनलकमोडिटी एंड डेरिवेटिव एक्सचेंज (NCDEX)
  • मल्टीकमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NCX)
  • इंडियनकमोडिटी एक्सचेंज (ICX)
  • नेशनलस्टॉक एक्सचेंज (NSE)
  • बोम्बेस्टोक एक्सचेन्ज ( BSE)

एक कुशल ब्रोकर का चयन: एक कुशल और विश्वसनीय ब्रोकर का चयन करना एक पहला महत्वपूर्ण चरण है क्योंकि यह आपकी ओर से सभी ट्रेडिंग करेगा। ब्रोकर का चयन  उनके अनुभव, दरों, ट्रेडिंग सूट और सेवाओं के दायरेके आधार पर करना चाहिए। यदि आप एक नए ट्रेडर हैं, तो एक आपको एक सम्पूर्ण सेवाएँ देने वाला ब्रोकर का चयन करना चाहिए जो आपको सूचित निर्णय लेने में मदद करने के लिए ट्रेडिंग संबंधी संस्तुतियाँ देंगे।

ट्रेडिंग अकाउंट खोलना: निवेशकों को कमोडिटी मार्केट में ट्रेड करने के लिए एक अलग कमोडिटी ट्रेडिंग अकाउंट खोलना होता है। ब्रोकर, अकाउंट खोलने के अनुरोध को स्वीकार या अस्वीकार करने से ताओं का विश्लेषण करेगा। एक बार जब ब्रोकर अनुमोदन कर देता है तो डीमैट अकाउंट खोल दिया जाता है।

प्रारंभिक डिपॉजिट बनाना: निवेश पहले निवेशक द्वारा प्रदान की गई जानकारी के आधार पर उसकी जोखिम उठाने की क्षम की शुरूआत करने  करने के लिए, निवेशक को  को प्रारंभिक डिपॉजिट करना होता है, जो आमतौर पर कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू का 5 से 10 प्रतिशत होता है।, ट्रेडर को ट्रेड के दौरान किसी भी नुकसान को पूरा करने के लिए मेंटेनेंस मार्जिन के साथ साथ, प्रारंभिक मार्जिन बनाए रखना होता है।

उदाहरण के लिए, गोल्ड की प्रारंभिक मार्जिन आवश्यकता 3200 है, जो गोल्ड की ट्रेडिंग यूनिट का 10 प्रतिशत होता है।

ट्रेडिंग प्लान बनाना: सभी प्रक्रियाएं पूरी हो जाने के बाद, अंतिम चरण में ट्रेडिंग प्लान बनाने की जरूरत होती है। एक ट्रेडिंग प्लान बनाए बिना, लंबे समय तक टिके रहना आसान नहीं है। इसके अलावा, एक ट्रेडरट्रेडर्स की रणनीति दूसरे के लिए उपयोगी नहीं हो सकती। इसलिए, आपको एक ऐसा प्लान बनाना चाहिए जो आपके लिए काम कर सकता है।

कमोडिटी के प्रकार

ट्रेडर्स वस्तुओं की चार प्रमुख श्रेणियों में ट्रेड कर सकते हैं।

धातु: आयरन, सोने, चांदी और प्लेटिनम जैसे कीमती धातुओं के साथ-साथ, उत्पादन और निर्माण में प्रयोग की जाने वाली धातुयें, जैसे, तांबा, एल्युमिनियम और निकल बाजार में ट्रेड के लिए उपलब्ध हैं।

ऊर्जा वस्तुएं: घरों और उद्योगों में इस्तेमाल किए जाने वाले ऊर्जा वस्तुएं थोक में ट्रेड की जाती हैं। ये ऊर्जा वस्तुएं प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल हैं। अन्य ऊर्जा वस्तुएं जो ट्रेड की जाती हैं, उनमें यूरेनियम, इथानॉल, कोयला और बिजली शामिल हैं।

कृषि वस्तुएं: कमोडिटी मार्केट में विभिन्न प्रकार के कृषि और पशुधन उत्पाद ट्रेडकिए जाते है। उदाहरण के लिए, चीनी, कोको, सोयाबीन, गेहूं, कपास व और अन्य।

पर्यावरणीय वस्तुएं: इस समूह में अक्षय ऊर्जा, कार्बन उत्सर्जन और व्हाइट सर्टिफिकेट शामिल हैं।

एक अन्य वर्गीकरण होता है  जो वस्तु को  कठोर और नरम वस्तुओं   के रूप में वर्गीकृत करता है। कठोर वस्तुओं में धातुएं, प्राकृतिक संसाधन और खनिज उत्पाद शामिल हैं,  जबकि कृषि और पशुधन उत्पाद नरम वस्तु  श्रेणी  में आते हैं।

कमोडिटी ट्रेडिंग की रणनीति

कमोडिटी मार्केट में निवेश  करने से पहले, आपको एक रणनीति बनाने की जरूरत होती है। लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए  कि एक ट्रेडर्स के लिए उपयोगी तकनीक आपके लिए काम नहीं भी कर सकती है। इसलिए, आपको भारत में अपने ज्ञान, जोखिम क्षमता, लाभ, लक्ष्य और कमोडिटी मार्केट के प्रकार के आधार पर प्लान बनाने की जरूरत होती है। आपको कमोडिटी ट्रेडिंग रणनीति बनाने में मदद करने के लिए यहां कुछ प्राथमिक नियम दिए गए हैं।

सीखने की इच्छा: किसी भी डोमेन में जाने से पहले, आपके लिए उस डोमेन की मूल समझ होना महत्वपूर्ण होता है। इसी प्रकार, कमोडिटी ट्रेडिंग के लिए, आपको कमोडिटी फ्यूचर और ऑप्शन की जानकारी और वे कैसे ट्रेड करते हैं, यह समझना चाहिए। इसकी गतिविधियों को समझने के लिए एक तरीका बाजार में बहुत समय बिताना है। कुछ वस्तुओं को प्राथमिक भारतीय कमोडिटी एक्सचेंज में ट्रेड किया जाता है। इसलिए, आपको शुरूआत करने के पहले कमोडिटी मार्केट की कार्यप्रणालियों के बारे में  खुद को शिक्षित करना होगा।

मार्जिन से संबन्धित आवश्यकता को समझना: जब मार्जिन का प्रयोग न्यायसंगत रूप से इस्तेमाल किया जाता है तो यह एक बेहतरीन साधन होतगा  है। चूंकि मार्जिन से आपको महत्वपूर्ण बोली लगाने की अनुमति मिलती है, इसलिए मार्जिन संबंधी आवश्यकताओं को समझना आवश्यक होता है।  आपको अधिकांश ब्रोकर, अपने ट्रेडिंग अकाउंट में न्यूनतम मार्जिन लिमिट बनाए रखने और उसमें कमी होने पर अधिक धन निवेश करने की आवश्यकता को बताएँगे।

कमोडिटी की आवृत्ति पर अंतर्दृष्टि: कुछ वस्तुओं को पूरे वर्ष ट्रेड किया जाता है। जबकि कुछ को  विशिष्ट महीनों के लिए ट्रेड किया जाता है या उनकी ट्रेडिंग आर्थिक चक्र पर निर्भर होती है। प्रत्येक कमोडिटी कॉन्ट्रैक्ट में अलग-अलग टिक वैल्यू होती है, जो यूनिट की कीमत में न्यूनतम परिवर्तन होने के वित्तीय परिणामों को प्रदर्शित करती है।

इसके अलावा, कई कमोडिटी फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट में कमोडिटी की भौतिक डिलीवरी लेने के संबंध में विभिन्न विशेषताएं शामिल हो सकती हैं, जबकि अन्य में केवल वित्तीय लेनदेन ही होता है।

कमोडिटी के गुणों की समझ: प्रत्येक अंतर्निहित वस्तु में मूल्य, मात्रा, प्रसार,  ओपन इंटरेस्ट आदि के बारे में विशिष्टताएं शामिल होती हैं। ये ऐसे गुण होते हैं जो ट्रेडर्स को विशेष कमोडिटी डेरिवेटिव की मांग की जानकारी देते हैं। आमतौर पर, एक्सचेंज, ट्रेडर को सूचित विकल्प चुनने में मदद करने के लिए इन पक्षों पर विस्तार से जानकारी प्रदान करते हैं।

ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग : आजकल, ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर ने पारंपरिक ओपन क्राई सिस्टम को बदल दिया है। यह मूल्य की खोज करने  में मदद करता है। ट्रेडर्स विभिन्न एप्लीकेशन का उपयोग करके बोली लगाते हैं, बिक्री करते हैं, लाभ के अवसर खोजते हैं, और खरीदने और बेचने की सलाह प्राप्त करते हैं।

मार्केट सपोर्ट और रेजिस्टेंस: किसी भी सिक्योरिटीज़ मार्केट की तरह, सफल ट्रेडिंग के लिए कमोडिटी ट्रेडिंग में सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल को समझना महत्वपूर्ण होता है।

जब मांग कम हो जाती है, तब  कीमत रसातल में जाने तक गिरने लगती है। इससे खरीददार बाज़ार के प्रति  आकर्षित होते हैं, और कीमत दोबारा बढ़ने लगती है। इसी प्रकार, जब मांग बढ़ती है, तब तक कीमत बढ़ जाती है  यह जब तक कि यह प्रतिरोध स्तर को नहीं छूता है  ट्रेंड रिवर्स नहीं करता है। बाजार में सफलतापूर्वक ट्रेड करने वाले किसी भी ट्रेडर्स को सहायता और प्रतिरोध स्तर के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

सहायता और प्रतिरोध स्तर खोजने की जानकारी के अंतर्गत, तकनीकी और मूलभूत विश्लेषण दोनों शामिल होते हैं।

अनुशासन का महत्व: एक सफल ट्रेडर बनने के लिए अनुशासन एक पूर्व आवश्यकता होती है। यह एक निवेश योजना बनाने और और मार्केट के उतार-चढ़ाव के बीच उस पर टिके रहने  की क्षमता है। यह किसी की वित्तीय सीमा को जानने की क्षमता को भी प्रदान करता है। पूरे नुकसान का सामना करने के लिए कभी भी अपने एसेट और लेवल से समझौता नहीं करना चाहिए। अनुभवी व्यापारियों को पता होता है कि वे किस ट्रेड को सफलतापूर्वक चला सकते हैं।

और अंत में, अपना सारा निवेश एक ही स्थान पर न करें। विविधीकरण सफल निवेश  और लंबे समय तक धन पैदा करने की कुंजी है।

कमोडिटी ट्रेडिंग के लाभ

कमोडिटी ट्रेडिंग के कई लाभ होते हैं।

मुद्रास्फीति से सुरक्षा: जब मुद्रास्फीति बढ़ती है, तो इससे कंपनियों के लिए उधार लेने को महंगा हो जाता है और उनकी लाभ-अर्जित करने की क्षमता प्रभावित होती है। इसके परिणामस्वरूप, उच्च मुद्रास्फीति की अवधि के दौरान स्टॉक की कीमतें गिरती हैं। दूसरी ओर, माल की लागत बढ़ जाती है, जिसका अर्थ यह है कि प्राथमिक वस्तुओं और कच्चे माल की कीमत बढ़ जाती है, जिससे कमोडिटी की कीमतें अधिक हो जाती हैं। इसलिए, जब मुद्रास्फीति बढ़ रही हो, तब कमोडिटी ट्रेडिंग लाभदायक हो जाती है।

राजनीतिक घटनाओं के खिलाफ सुरक्षा: दंगों, युद्ध और संघर्ष जैसी घटनाओं के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो जाती है, जिससे प्राथमिक सामग्री महंगी जाती हैं, और व्यापक बाजार निराशावाद के बीच, शेयरों के मूल्य धड़ाम हो जाते हैं। ऐसी स्थितियों में, कमोडिटी निवेश  कुछ नुकसान को रोकने में मदद कर सकता है।

उच्च लाभ की सुविधा: ट्रेडर्स कमोडिटी मार्केट में निवेश करके अपनी लाभ क्षमता को बढ़ा सकते हैं। यह व्यापारियों को 5 से 10 प्रतिशत मार्जिन का भुगतान करके बाजार में महत्वपूर्ण स्थिति बना लेने की अनुमति देता है। इस तरह, एक महत्वहीन मूल्य वृद्धि में लाभ की क्षमता को तेजी से बढ़ा सकती है। हालांकि न्यूनतम मार्जिन आवश्यकता अलग अलग कमोडिटी के लिए भिन्न भिन्न होती है, लेकिन यह अभी भी इक्विटी निवेश के लिए आवश्यक मार्जिन से कम है।

विविधीकरण: कमोडिटी निवेशक को अपने पोर्टफोलियो को विविधीकृत करने की अनुमति देती है क्योंकि कच्चे माल में स्टॉक के साथ नकारात्मक या कम संबंध होता है। महंगाई बढने पर   कमोडिटी की कीमतें बढ़ जाती हैं, जिससे लाभ का मार्जिन कम हो जाता है जिससे निवेशक के साथ साझा करने के लिएबहुत कम राशि होती है। मुद्रास्फीति के कारण, इक्विटी मार्केट में कैश फ्लो भी कम हो जाता है। लेकिन स्टॉक की कीमत और कमोडिटी के बीच नकारात्मक संबंध होने के कारण, कमोडिटी मार्केट महंगाई के खिलाफ प्रभावी सुरक्षा प्रदान करता है।

पारदर्शिता: कमोडिटी मार्केट विकसित हो रहा है और यह अत्यधिक विनियमित है। परंपरागत ओपन क्राई विधि के विपरीत, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग सूट ने बाजार की पारदर्शिता और दक्षता में वृद्धि की है। व्यापक स्तर की  भागीदारी होने के कारण इसमें उचित मूल्य की खोज आसान हो गई है। यह आपूर्ति और मांग द्वारा संचालित होती है, जिसके कारण इसमें  मैनिपुलेशन का  जोखिम  दूर हो गया है।

कमोडिटी ट्रेडिंग से हानियाँ

कई प्रकार से लाभप्रद होने के बावजूद, कमोडिटी ट्रेडिंग की कुछ हानियाँ होती हैं, जिन्हें आपको निवेश  करने से पहले ज्ञात होना चाहिए।

लाभ: विशेष रूप से, अगर आपको मार्जिन ट्रेडिंग का अनुभव नहीं है तो यह आपके लिए एक दुधारी तलवार हो सकता है।

जैसा कि पहले चर्चा की गई है, लाभ के कारण ट्रेडर्स  बाजार में बड़ी बोली लगाते हैं। अगर मार्जिन 5 प्रतिशत है, तो कोई भी केवल रु. 5000 का भुगतान करके रु. 100,000 की कीमत वाले कमोडिटी फ्यूचर खरीद सकता है। इसका मतलब यह है कि कीमत में थोड़ा गिरावट के साथ, ट्रेडर्स को एक महत्वपूर्ण राशि का नुकसान हो सकता है।

उच्च अस्थिरता: कमोडिटी ट्रेडिंग से अधिक रिटर्न कमोडिटी के मूल्य मेंउच्च अस्थिरता के कारण होता है। जब माल की मांग और आपूर्ति में लचीलापन नहीं होता है तो मूल्य मांग और आपूर्ति द्वारा प्रेरित होते हैं। इसका मतलब है मूल्य में परिवर्तन होने के बावजूद, आपूर्ति और मांग परिवर्तन नहीं होता है, जो कमोडिटी फ्यूचर के मूल्य को महत्वपूर्ण रूप से बदल सकता है।

विविधता के लिए आदर्श नहीं: प्रतिभूतियों और वस्तुओं के बीच नकारात्मक सहसंबंध होने के बावजूद, कोमोडिटी पोर्टफोलियो में विविधता के लिए उपयुक्त नहीं है। वह सिद्धांत, कि कमोडिटी का मूल्य स्टॉक के मूल्य के साथ विपरीत दिशा में चलता है, 2008 के आर्थिक संकट के दौरान ऐसा अनुभव नहीं किया गया। मुद्रा स्फीति बढ्ने पर बेरोजगारी और मांग की कमी के कारण कंपनियाँ अपने उत्पादन को रोकती है और कमोडिटी मार्केट में कच्चे माल की मांग को प्रभावित करती है।

कम रिटर्न लेकिन अधिक अस्थिरता: कमोडिटी ट्रेडिंग में महत्वपूर्ण रिटर्न हासिल करने के लिए थोक में निवेश करने की की आवश्यकता होती है। गोल्ड स्टैंडर्ड मानी जाने वाली ब्लूमबर्ग कमोडिटी इंडेक्स से यह पता चलता है कि कि सबसे सुरक्षित सरकारी बांड भी ऐतिहासिक रूप से कमोडिटी ट्रेडिंग की तुलना में अधिक रिटर्न प्राप्त कर चुके हैं। यह मुख्य रूप से उत्पाद की चक्रीय प्रकृति के कारण होता है, जो खरीदने और रोक कर रखने वाले करने वाले निवेशक के लिए निवेश के मूल्य को क्षति पहुंचाता है। यहां तक कि सिक्योर्ड ट्रेजरी बिल्स भी कमोडिटी मार्केट की तुलना में कम अस्थिरता पर अधिक रिटर्न प्रदान करते हैं।

एसेट कंसंट्रेशन: जब कमोडिटी में निवेश करने का प्राथमिक कारण पोर्टफोलियो को विविधता प्रदान करना है, तब भी कमोडिटी निवेश साधन अक्सर एक या दो इंडस्ट्री पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिसका अर्थ एक सेगमेंट में एसेट का उच्च कोन्सेंट्रेशन है। 

कमोडिटी ट्रेडिंग से संबन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कमोडिटी की कैश प्राइस क्या है?

वास्तविक दुनिया में खरीदे और बेचे जाने पर कमोडिटी की कीमत वास्तविक वस्तुओं का मूल्य प्रदर्शित करती है। इसमें प्रोडक्ट के ट्रांसपोर्टेशन और स्टोरेज के लिए किए गए खर्च जैसे अन्य खर्च शामिल हो सकते हैं।

कमोडिटी का क्या मतलब है?

कमोडिटी ट्रेडिंग के संदर्भ में, कमोडिटी प्राथमिक प्रोडक्ट या कच्चे माल जैसे धातु, कृषि सामान, पशुधन और ऊर्जा प्रोडक्ट हैं जो कमोडिटी मार्केट में ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हैं।

कमोडिटी ट्रेडिंग का विनियमन कैसे किया जाता है?

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड कमोडिटी बाजार को नियंत्रित करता है। देश में छह कमोडिटी एक्सचेंज हैं जहां ट्रेडर्स विस्तृत श्रेणी के उत्पादों में ट्रेड करते हैं। कमोडिटी मार्केट अत्यधिक विकसित और सबसे नियमित बाजारों में से एक है।

किन आइटम को कमोडिटी माना जाता है?

कमोडिटी मार्केट में उपलब्ध कमोडिटी तीन प्रमुख वर्गों के अंतर्गत उपलब्ध हैं।

  • कृषिवस्तुएं
  • धातुवस्तुएं
  • ऊर्जावस्तुएं

भारत में कमोडिटी फॉरवर्ड/फ्यूचर ट्रेडिंग में नियमन की वर्तमान प्रणाली क्या है?

फॉरवर्ड मार्केट कमीशन (FMC) कमोडिटी फ्यूचर्स मार्केट का नियामक होता है। वर्तमान नियमन प्रणाली वित्त मंत्रालय, फॉरवर्ड मार्केट कमीशन (FMC) और विनिमय मंत्रालय के साथ त्रिस्तरीय दृष्टिकोण का पालन करती है।

भारत सरकार फ्यूचर ट्रेड संबंधी नीतियां तैयार करती है। एफ़एमसी,जिसका गठन 1953 में हुआ था, सरकार की नीतियों के बाद विनिमय के नियम और विनियमों को मंजूरी देती है। और तीसरे, बोर्स ट्रेडिंग के लिए प्लेटफॉर्म और फ्रेमवर्क प्रदान करते हैं। फॉरवर्ड मार्केट कमीशन 1952 के फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट (रेगुलेशन) एक्ट का उपयोग करके मार्केट को नियंत्रित करता है।