आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 143(1) के तहत मिलने वाला इंटिमेशन वह ऑटोमेटेड मैसेज है, जिसे आयकर विभाग आपके इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) की प्रोसेसिंग पूरी होने के बाद जारी करता है। इस इंटिमेशन का मतलब यह नहीं होता कि आपने कोई गलती की है। यह रिटर्न दाखिल करने के बाद की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। यह सूचना आमतौर पर ईमेल या एसएमएस के जरिए भेजी जाती है और इसे इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर भी देखा जा सकता है।
इस लेख में हम जानेंगे कि धारा 143(1) का इंटिमेशन क्या होता है, इसे किन परिस्थितियों में जारी किया जाता है, इसे कैसे डाउनलोड करें और इसके बाद क्या करना चाहिए, ताकि आप इस प्रक्रिया को आसानी से समझ सकें और जरूरत पड़ने पर सही कदम उठा सकें।
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मुख्य बातें
- धारा 143(1) के तहत मिलने वाला इंटिमेशन आयकर विभाग की ओर से जारी एक ऑटोमेटेड सारांश होता है, जिसमें आपके दाखिल आईटीआर की विभाग की गणना से तुलना की जाती है।
- इससे पता चलता है कि आपको टैक्स रिफंड मिलेगा, अतिरिक्त टैक्स जमा करना होगा या फिर आपके रिटर्न में कोई अंतर नहीं है (नो डिमांड, नो रिफंड)।
- यदि इंटिमेशन में अतिरिक्त टैक्स की मांग की गई है, तो उसे ध्यान से जांचें। यदि आप उससे सहमत हैं, तो भुगतान करें। यदि असहमत हैं, तो धारा 154 के तहत ऑनलाइन रेक्टिफिकेशन रिक्वेस्ट दाखिल कर सकते हैं।
धारा 143(1) के तहत मिलने वाला इंटिमेशन लेटर क्या होता है?
धारा 143(1) के तहत मिलने वाला इंटिमेशन लेटर वह आधिकारिक पत्र है, जिसे आयकर विभाग आपके आईटीआर की प्रोसेसिंग पूरी होने के बाद जारी करता है। इसमें शुरुआती जांच के दौरान किए गए किसी भी एडजस्टमेंट या निष्कर्ष का सारांश दिया जाता है।
सरल शब्दों में कहें तो, यह आपके द्वारा आईटीआर में दी गई जानकारी और आयकर विभाग के सिस्टम द्वारा की गई गणना के बीच तुलना दिखाता है। यदि दोनों में कोई अंतर नहीं होता, तो इसका मतलब है कि विभाग ने आपका रिटर्न स्वीकार कर लिया है।
आयकर अधिनियम, 1961 के तहत सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर (सीपीसी) को धारा 143(1) के अंतर्गत रिटर्न की गणना की जांच करने, फॉर्म 26एएस और एआईएस से उसका मिलान करने तथा किसी भी विसंगति की पहचान करने का अधिकार है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि करदाताओं द्वारा दाखिल किए गए रिटर्न सही हों, ताकि आगे की विस्तृत जांच की जरूरत पड़ने पर सही आधार उपलब्ध हो।
ध्यान रखें कि धारा 143(1) का इंटिमेशन किसी प्रकार का नोटिस नहीं होता। यह केवल कंप्यूटर द्वारा तैयार किया गया एक स्वचालित विवरण होता है। इसका मतलब यह नहीं है कि आपके खिलाफ कोई जांच या ऑडिट शुरू हो गया है।
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धारा 143(1) के तहत किस तरह के एडजस्टमेंट किए जा सकते हैं?
आयकर अधिनियम की धारा 143(1) के तहत सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर (सीपीसी), इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) की प्रोसेसिंग के दौरान सटीकता और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए कुछ स्वचालित एडजस्टमेंट कर सकता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
गणना संबंधी गलतियां (अरिथमेटिकल एरर्स):
यदि कुल आय, कटौतियों (डिडक्शंस) या टैक्स देनदारी की गणना में कोई गलती हो, तो सीपीसी उसे खुद ठीक कर देता है। उदाहरण के लिए, अलग-अलग स्रोतों से हुई आय का गलत जोड़ या टैक्स स्लैब के अनुसार गलत टैक्स गणना।
गलत दावे (फॉल्स क्लेम्स):
यदि आपने ऐसी कटौती या छूट का दावा किया है, जिसकी अनुमति आयकर अधिनियम नहीं देता, तो सीपीसी उसे संशोधित कर सकता है। जैसे, नई टैक्स व्यवस्था चुनने के बावजूद पुरानी व्यवस्था के तहत मिलने वाली स्टैंडर्ड डिडक्शन का दावा करना या निर्धारित सीमा से अधिक कटौती दिखाना। यदि रिटर्न में ऐसी गलतियां ठीक नहीं की गई हैं, तो उपलब्ध ऑडिट रिपोर्ट या रिटर्न के आधार पर सीपीसी उन्हें संशोधित कर देता है।
फॉर्म 26एएस या एआईएस से मेल न खाना:
यदि आईटीआर में दर्ज टीडीएस, एडवांस टैक्स या सेल्फ असेसमेंट टैक्स की जानकारी फॉर्म 26एएस या एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (एआईएस) से मेल नहीं खाती, तो सीपीसी उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर आवश्यक संशोधन करता है।
इन सभी बदलावों की जानकारी पूरी तरह पारदर्शी तरीके से धारा 143(1) के इंटिमेशन पीडीएफ में दी जाती है। यदि किसी बदलाव का असर आपके अंतिम टैक्स की गणना पर पड़ता है, तो इसकी सूचना भी इसी इंटिमेशन के माध्यम से दी जाती है, ताकि आप जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई कर सकें।
धारा 143(1) के तहत इंटिमेशन मिलने के सामान्य कारण
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 143(1) के तहत इंटिमेशन मिलने का मतलब यह नहीं है कि आपने कोई गलती की है। यह आईटीआर की प्रोसेसिंग पूरी होने के बाद जारी की जाने वाली एक सामान्य स्वचालित सूचना है। यह कई कारणों से जारी हो सकती है, जैसे:
टीडीएस या टीसीएस की जानकारी में अंतर:
यदि आपके नियोक्ता, बैंक या किसी अन्य संस्था द्वारा फॉर्म 26एएस, एआईएस या फॉर्म 16 में दी गई जानकारी आपके आईटीआर से मेल नहीं खाती, तो इंटिमेशन जारी किया जा सकता है।
आय की गलत जानकारी:
यदि ब्याज, कैपिटल गेन, डिविडेंड, किराया या किसी अन्य स्रोत से हुई आय पूरी तरह नहीं दिखाई गई है या गलत दर्ज की गई है, तो आयकर विभाग का सिस्टम विभिन्न स्रोतों से उसका मिलान कर अंतर की पहचान कर लेता है।
कटौती या छूट में विसंगति:
यदि आपने 80C, 80D, 80G, एचआरए/एलटीए आदि के तहत निर्धारित सीमा से अधिक कटौती का दावा किया है या उसका रिकॉर्ड एआईएस या फॉर्म 26एएस से मेल नहीं खाता, तो सिस्टम आवश्यक एडजस्टमेंट कर सकता है।
आईटीआर का सत्यापन न करना:
केवल आईटीआर दाखिल करना पर्याप्त नहीं है। उसका सत्यापन भी जरूरी है। यदि निर्धारित समय के भीतर आधार ओटीपी, नेट बैंकिंग या आईटीआर-वी के जरिए सत्यापन नहीं किया जाता, तो सिस्टम रिटर्न प्रोसेस करते समय इसे चिन्हित कर सकता है।
तकनीकी या सिस्टम आधारित पुनर्गणना:
कई बार सिस्टम धारा 87A, 234A ,234B या 234C के तहत ब्याज, लेट फीस या टैक्स रिबेट की गणना दोबारा करता है
यदि आपकी गणना और विभाग की गणना में अंतर होता है, तो उसके आधार पर भी इंटिमेशन जारी हो सकता है।
धारा 143(1) का इंटिमेशन कैसे डाउनलोड करें?
यदि किसी करदाता को ईमेल या एसएमएस के माध्यम से यह सूचना मिली है कि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 143(1) के तहत इंटिमेशनजारी किया गया है, तो इसे आधिकारिक इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकता है. तरीका इस प्रकार है:
- आधिकारिक इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाएं.
- अपने आधार या पैन नंबर और पासवर्ड की मदद से लॉग इन करें.
- "ई-फाइल" के तहत "इनकम टैक्स रिटर्न्स" → "व्यू फाइल्ड रिटर्न्स" पर क्लिक करें.
- उस आईटीआर का चयन करें, जिसके लिए धारा 143(1) का इंटिमेशन जारी हुआ है.
- विवरण में "डाउनलोड इंटिमेशन ऑर्डर (यू/ एस 143(1))" पर क्लिक करें. यह फाइल पासवर्ड-सुरक्षित पीडीएफ के रूप में डाउनलोड हो जाएगी.
- इसमें अपना नाम, पैन, असेसमेंट ईयर, आईटीआर एक्नॉलेजमेंट नंबर, आपके द्वारा घोषित आय और कटौतियां बनाम विभाग की गणना तथा यह जांचें कि आपके लिए टैक्स की मांग(टैक्स डिमांड) है या रिफंड.
- यदि किसी प्रकार का कोई बदलाव या अंतर नहीं है, तो आगे किसी कार्रवाई की आवश्यता नहीं है.
- यदि अतिरिक्त टैक्स की मांग की गई है या कोई एडजस्टमेंट किया गया है:
- आप सीधे पोर्टल के माध्यम से जवाब दे सकते हैं या भुगतान कर सकते हैं.
- यदि आप विभाग की गणना से सहमत नहीं हैं, तो आवश्यकता अनुसार धारा 154 के तहत रेक्टिफिकेशन रिक्वेस्ट या धारा 139(5) के तहत रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं.
- वैकल्पिक तरीका (ई-प्रोसीडिंग्स के माध्यम से):
- यदि यह सूचना ई-प्रोसीडिंग्स के जरिए जारी की गई है, तो इसे "पेंडिंग एक्शंस" → "ई-प्रोसीडिंग्स" → "कम्प्लीटेड प्रोसीडिंग्स" में भी देखा जा सकता है.
- यदि रिटर्न दाखिल किए गए वित्तीय वर्ष की समाप्ति से 9 महीने के भीतर धारा 143(1) काकोई इंटिमेशन जारी नहीं होता, तो आईटीआर एक्नॉलेजमेंट को ही धारा 143(1) का इंटिमेनमाना जाता है.
नोट: यदि ईमेल या एसएमएस मिलने के बाद भी "डाउनलोड इंटिमेशन" का विकल्प दिखाई नहीं देता, तो आप इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर शिकायत (ग्रीवांस) दर्ज कर सकते हैं या सीपीसी बेंगलुरु से संपर्क कर सकते हैं.
इंटिमेशन देखने के लिए लॉग इन करने की प्रक्रिया
इंटिमेशन को सुरक्षित तरीके से देखने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स अपनाएं:
- आधिकारिक इनकम टैक्स पोर्टल पर जाएं और 'लॉगिन' पर क्लिक करें।
- अपना आधार नंबर/पैन नंबर, पासवर्ड और कैप्चा नंबर दर्ज करें।
- लॉग इन करने के बाद "ई-फाइल → इनकम टैक्स रिटर्न्स → व्यू फाइल्ड रिटर्न्स" सेक्शन में जाएं।
- संबंधित असेसमेंट ईयर चुनें।
-
पीडीएफ फाइल डाउनलोड करें।
यह फाइल पासवर्ड से सुरक्षित होती है। इसे खोलने के लिए पासवर्ड के रूप में पैन (छोटे अक्षरों में) + जन्मतिथि (डीडीएमएमवाईवाईवाई) दर्ज करनी होती है।उदाहरण के लिए, यदि आपका पैन 'ABCDE1234F' है और जन्मतिथि 15 जुलाई 1990 है, तो पासवर्डabcde1234f15071990 होगा।
इस अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि ईमेल किसी अन्य व्यक्ति तक पहुंच भी जाए, तब भी आपकी गोपनीय टैक्ससंबंधी जानकारी सुरक्षित रहे।
सेक्शन 143(1) का इंटिमेशन मिलने के बाद क्या करें?
इंटिमेशन डाउनलोड करके खोलने के बाद अगला कदम इस बात पर निर्भर करेगा कि उसमें क्या परिणाम दिया गया है। आमतौर पर इंटिमेशन में इनमें से कोई एक स्थिति होती है:
- रिफंड देय
- टैक्स देय
- कोई विसंगति नहीं
आइए जानते हैं, हर स्थिति में क्या करना चाहिए।
अगर रिफंड मिलना है
यदि इंटिमेशन में बताया गया है कि आपको रिफंड मिलेगा, तो सबसे पहले यह जांच लें कि आपका बैंक अकाउंट ई-फाइलिंग पोर्टल पर प्री-वैलिडेटेड है या नहीं। इसके लिए:
- "प्रोफाइल → माई बैंक अकाउंट" पर जाएं।
- बैंक अकाउंट को वेरिफाई करें और उसे पैन से लिंक करें।
- रिफंड का स्टेटस एनएसडीएल रिफंड स्टेटस पोर्टल या ई-फाइलिंग पोर्टल पर ट्रैक करें।
आमतौर पर सिस्टम द्वारा सेक्शन 143(1) का इंटिमेशन स्वीकार किए जाने के बाद 20 से 45 दिनों के भीतर रिफंड प्रोसेस हो जाता है।
अगर टैक्स देना है
यदि इंटिमेशन में टैक्स की मांग की गई है:
- ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करें और "पेंडिंग एक्शंस" → "रिस्पॉन्स टू आउटस्टैंडिंग डिमांड" पेज पर जाएं।
- सभी विवरण ध्यान से जांचें।कई बार यह टीडीएस के मिसमैच या गलत जानकारी भरने के कारण भी हो सकता है।
- यदि आप टैक्स मांग से सहमत हैं, तो चालान नंबर 280 → "टैक्स ऑन रेगुलर असेसमेंट (400)" के जरिए ई-पे टैक्स सेवा से भुगतान करें।
- यदि आप गणना से सहमत नहीं हैं, तो आवश्यक प्रमाणों के साथ सेक्शन 154 के तहत रेक्टिफिकेशन रिक्वेस्ट दाखिल करें।
- यदि गलती आपकी मूल आईटीआर में है, तो रेक्टिफिकेशन रिक्वेस्ट के बजाय निर्धारित समय सीमा के भीतर रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करें।
- बकाया टैक्स पर सेक्शंस 234बी और 234सी के तहत ब्याज भी लगता है। इसलिए समय पर कार्रवाई करना जरूरी है।
अगर कोई विसंगति नहीं है
यदि आपके द्वारा दाखिल किए गए आंकड़े और विभाग की गणना पूरी तरह मेल खाते हैं, तो इसका मतलब है कि आपकी रिटर्न बिना किसी बदलाव के स्वीकार कर ली गई है। इस स्थिति में आपको कोई अतिरिक्त कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है। भविष्य में जरूरत पड़ने पर, जैसे लोन या वीजा आवेदन के लिए, इस पीडीएफ कॉपी को सुरक्षित रखें।
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सेक्शन 143(1) के इंटिमेशन का जवाब कैसे दें?
यदि इंटिमेशन में कोई ऐसी त्रुटि है, जिस पर आपको आपत्ति है, तो आप सेक्शन 154 के तहत ऑनलाइन रेक्टिफिकेशन रिक्वेस्ट दाखिल कर सकते हैं।
जवाब देने के लिए ये स्टेप्स अपनाएं:
- ई-फाइल अकाउंट में लॉग इन करें।
- "सर्विसेज → रेक्टिफिकेशन" पर जाएं।
- संबंधित असेसमेंट ईयर चुनें।
- सिस्टम की गलती होने पर 'ओनली रीप्रोसेस द रिटर्न', या वास्तविक सुधार के लिए 'रेक्टिफाई मिस्टेक' विकल्प चुनें।
- जरूरत होने पर संशोधित एक्सएमएल/जेएसओएन फाइल अपलोड करें।
- अनुरोध सबमिट करें और "व्यू फाइल्ड रिटर्न्स" के जरिए उसका स्टेटस देखें।
इस सुविधा की मदद से बिना टैक्स कार्यालय जाए भी अनजाने में हुई कई तरह की गलतियों को आसानी से सुधारा जा सकता है।
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निष्कर्ष
सेक्शन 143(1) का इंटिमेशन इस बात की पुष्टि करता है कि इनकम टैक्स विभाग ने आपकी आईटीआर सफलतापूर्वक प्रोसेस कर ली है। इसके उद्देश्य को समझना, इसमें दी गई जानकारी को सही ढंग से पढ़ना और जरूरत पड़ने पर उचित कार्रवाई करना टैक्स अनुपालन को आसान बनाता है और अनावश्यक परेशानियों से बचाता है।
आईटीआर दाखिल करने से पहले उसे फॉर्म 26एएस और एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (एआईएस) से मिलान कर लेना चाहिए, ताकि किसी भी तरह की विसंगति की संभावना कम हो। साथ ही, सभी रिकॉर्ड और प्राप्ति रसीदों को सुरक्षित रखना भी जरूरी है, क्योंकि भविष्य में वित्तीय सत्यापन या अन्य जरूरतों के लिए उनकी आवश्यकता पड़ सकती है। ध्यान रखें कि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 143(1) के तहत मिलने वाला इंटिमेशन, इनकम टैक्स विभाग की ओर से आपकी आईटीआर प्रोसेस होने के बाद जारी किया जाने वाला एक ऑटोमेटेड कम्युनिकेशन है।

