आयकर विभाग हाई-स्पेंडर्स पर रख रहा नज़र, जानें कौन-कौन सी हाई-वैल्यू कैश ट्रांजैक्शन पर हो रहा स्कैन

आयकर विभाग अब उन व्यक्तियों पर कड़ी नजर रख रहा है जो बड़ी मात्रा में नकद लेनदेन करते हैं, लेकिन अपनी आय पूरी तरह रिपोर्ट नहीं करते। विभिन्न संस्थाओं के सहयोग और उन्नत डेटा विश्लेषण तकनीक के माध्यम से विभाग यह पता लगा रहा है कि कौन-कौन से ट्रांजैक्शन निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन(SFT) की श्रेणी में आते हैं।
क्या हैं हाई-वैल्यू कैश ट्रांजैक्शन
विभाग ने पाँच प्रमुख प्रकार की लेनदेन की पहचान की है जिन्हें उच्च मूल्य नकद लेनदेन माना गया है:
- बचत बैंक में ₹10 लाख या उससे अधिक की नकद जमा या निकासी
- चालू खाते में ₹50 लाख या अधिक की नकद जमा या निकासी
- नकद में ₹10 लाख या उससे अधिक की फिक्स्ड डिपॉजिट या अन्य देनदारियां (जैसे डिबेंचर)
- नकद में ₹10 लाख या उससे अधिक का निवेश—जैसे म्यूचुअल फंड, शेयर आदि
- नकद में ₹1 लाख या अधिक का क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान
- गैर-नकद क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान ₹10 लाख या उससे ऊपर
- कोई भी ₹30 लाख या उससे ज्यादा की अचल संपत्ति की खरीद या बिक्री
- विदेशी मुद्रा में ₹10 लाख या उससे अधिक का लेनदेन जैसे फॉरेक्स कार्ड, ट्रैवेलर सूचियाँ आदि
विभाग इन लेनदेन को निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन(SFT) के तहत रिपोर्ट करता है, जो अलग-अलग संस्थाओं जैसे बैंक, डाकघर, म्यूचुअल फंड ट्रस्टी आदि द्वारा मई महीने में जमा करवाई जाती है।
डेटा विश्लेषण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका
आयकर विभाग अब स्वचालित सिस्टम, फॉर्म 26AS में निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन विवरण और एआई-आधारित डेटा एनालिसिस का उपयोग कर यह पता लगा रहा है कि किसने बड़ी रकम खर्च की, लेकिन उसकी आय में ऐसा कोई संकेत नहीं दिखाया ।
यदि किसी व्यक्ति ने एक वित्तीय वर्ष में नकद में ₹1 करोड़ से अधिक निकाला, तो उस पर 2% स्रोत पर कर कटौती (TDS) लगेगा; यदि पिछले तीन वर्षों तक इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरा है, तो ₹20 लाख से ऊपर निकासी पर भी 2% और ₹1 करोड़ से ऊपर पर 5% स्रोत पर कर कटौती लागू होगा।
फ़ायदे और सावधानियाँ
यह कदम वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने और काले धन रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। यदि आपने अपने उच्च मूल्य नकद लेनदेन को अपनी आय में सही तरीके से रिपोर्ट नहीं किया, तो आपको विभाग द्वारा ई-संपर्क के तहत नोटिस मिल सकता है और समय पर जवाब न देने पर जुर्माने का जोखिम बन सकता है।
डिपॉजिट या खर्च बड़ी राशि में होने पर लेनदेन की जानकारी आपके फॉर्म 26AS और AIS (वार्षिक सूचना विवरण) में दिखेगी, जिसे आप विभाग की ई-फाइलिंग वेबसाइट से जांच सकते हैं।
आगे पढ़ें: भारतीय स्टेट बैंक ने वित्त वर्ष 25 के लिए केंद्र सरकार को ₹8,000 करोड़ का लाभांश दिया!
निष्कर्ष
बड़ी नकद लेनदेन पर अब विभाग की नज़र तीव्र हो गई है। ऐसे ट्रांजैक्शन करने वाले करदाता को सावधान रहकर, फ़ॉर्म 26AS/AIS की जांच करते हुए आयकर रिटर्न(ITR) में सही जानकारी दर्ज करने की चाहिए, ताकि नोटिस और जुर्माने से बचा जा सके।
अस्वीकरण: यह ब्लॉग केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है। उल्लिखित प्रतिभूतियां केवल उदाहरण हैं और सिफारिशें नहीं हैं। यह व्यक्तिगत सिफारिश/निवेश सलाह नहीं है। इसका उद्देश्य किसी भी व्यक्ति या संस्था को निवेश निर्णय लेने के लिए प्रभावित करना नहीं है। प्राप्तकर्ताओं को निवेश निर्णय लेने के बारे में एक स्वतंत्र राय बनाने के लिए अपना शोध और आकलन करना चाहिए।
प्रतिभूति बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं, निवेश करने से पहले सभी संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें।
प्रकाशित:: 12 Jun 2025, 6:53 pm IST

Team Angel One
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