IPO से पहले NSE को UPI MDR शुल्क के कारण ट्रेडिंग वॉल्यूम में अस्थायी असर की आशंका

NSE को बड़े मूल्य के UPI भुगतानों पर नए MDR शुल्क लागू होने के कारण ट्रेडिंग वॉल्यूम में शुरुआती गिरावट की आशंका है।
अपने बहुप्रतीक्षित IPO से ठीक पहले, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने माना है कि ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतानों पर नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने से उसके ट्रेडिंग वॉल्यूम में शुरुआती गिरावट देखने को मिल सकती है।
UPI MDR शुल्क पर NSE का रुख
रिपोर्ट के अनुसार, 15 सितंबर 2026 को NSE के Managing Director और CEO Ashishkumar Chauhan ने बड़े मूल्य के UPI लेनदेन पर हाल ही में लागू किए गए MDR शुल्क के असर को लेकर उठाई गई चिंताओं पर स्थिति साफ की।
Chauhan के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर लगाए गए 0.4% शुल्क का शुरुआती दौर में ट्रेडिंग वॉल्यूम पर असर पड़ने की संभावना है।
हालांकि, उनका मानना है कि यह असर अस्थायी होगा और समय के साथ बाजार की गतिविधियां सामान्य स्तर पर लौट आएंगी।
MDR शुल्क की जानकारी
सरकार ने ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शंस पर 0.4% MDR शुल्क लगाने की घोषणा की है। ₹75,000 और उससे अधिक के लेनदेन पर शुल्क की अधिकतम सीमा ₹300 तय की गई है।
यह जनवरी 2020 में शुरू की गई जीरो-MDR व्यवस्था खत्म होने का संकेत है, जिसका उद्देश्य डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना था। ₹2,000 तक के मर्चेंट ट्रांजैक्शंस इन शुल्कों से मुक्त रहेंगे।
जीरो-MDR व्यवस्था का अंत और बाजार की प्रतिक्रिया
पिछली जीरो-MDR नीति को बैंकों और fintech कंपनियों की आलोचना का सामना करना पड़ा था। उनका कहना था कि यह व्यवस्था लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है। हाल ही में MDR शुल्क लागू होने के बाद NSE ने ट्रेडिंग वॉल्यूम में शुरुआती गिरावट की संभावना जताई है, लेकिन उसे भरोसा है कि समय के साथ कारोबार/वॉल्यूम फिर सामान्य हो जाएगा।
यह कदम बड़े डिजिटल भुगतानों या मर्चेंट्स के लिए एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि अब वे नई व्यवस्था के अनुसार काम कर रहे हैं।
बड़े डिजिटल मर्चेंट भुगतानों पर MDR का असर
MDR लागू होने से ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर एक नई लागत जुड़ गई है। ₹75,000 से अधिक के भुगतानों पर शुल्क की अधिकतम सीमा तय करके, इस व्यवस्था का उद्देश्य वित्तीय स्थिरता और व्यापारियों के हितों के बीच संतुलन बनाना है।
वहीं, छोटे लेनदेन को अब भी शुल्क से छूट दी गई है, ताकि कम मूल्य वाले क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलता रहे।
निष्कर्ष
पहले चरण में लागू किए गए नए MDR शुल्क से ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतानों के कारण NSE के ट्रेडिंग वॉल्यूम पर अल्पकालिक असर पड़ सकता है, लेकिन इसके समय के साथ सामान्य होने का अनुमान है। यह नीति पहले की जीरो-MDR व्यवस्था में बदलाव करते हुए 0.4% शुल्क लागू करती है, जिससे बड़े डिजिटल भुगतानों की व्यवस्था पर असर पड़ेगा।
प्रकाशित:: 17 Sept 2026, 2:35 am IST

Team Angel One
- जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO से पहले जियो एयरफाइबर की रणनीति: FWA और UBR के जरिए ग्राहक अधिग्रहण लागत (CAC) घटाना और प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व (ARPU) बढ़ाना
- जियो प्लेटफॉर्म्स IPO से जुटाए गए फंड से करीब ₹27,000 करोड़ का कर्ज चुकाएगी
- Jio Platforms IPO: Shareholder Quota का फायदा उठाने के लिए कब तक होने चाहिए RIL के शेयर? समझें पूरा गणित
- FY24-26 के बीच 36% घटा Jio Platforms का 'कैश कैपेक्स': IPO पर क्या पड़ेगा असर?
- जियो के IPO की तैयारियों के बीच, जानें Elon Musk के Starlink से इसकी तुलना
संबंधित लेख
- रिसर्च
- शेयर मार्केट
- पर्सनल फाइनेंस
- मार्केट अपडेट्स
- शेयर मार्केट
- फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस
- ग्लोबल मार्केट
- कमोडिटीज़
- टैक्सेशन
- प्रोडक्ट अपडेट्स
- बजट
- आईपीओज़
- म्यूचुअल फंड्स
- अर्थव्यवस्था
- मार्केट मास्टर्स
- अर्थव्यवस्था
- अन्य
- बॉन्ड्स
- ग्लोबल स्टॉक
- ट्रेडिंग
- इंश्योरेंस
- खर्चे
- निवेश
- क्रूड ऑयल
- टाटा आईपीएल
- गॉवर्नमेंट स्किम्स
- स्टॉक्स
- अनलिस्टेड कंपनियां




