
भारत ने 2025 में अपनी सैन्य पर $92.1 बिलियन खर्च किए, जिससे यह स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ईयरबुक 2026 के अनुसार वैश्विक स्तर पर पांचवां सबसे बड़ा रक्षा खर्च करने वाला देश बन गया।
रिपोर्ट में कहा गया कि खर्च 2024 से 8.9% बढ़ा। इसने यह भी बताया कि 2021-2025 के दौरान भारत दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक था, जो 5-वर्षीय अवधि में वैश्विक आयात का 8.2% था।
ईयरबुक ने अनुमान लगाया कि जनवरी 2026 तक भारत के पास लगभग 190 परमाणु हथियार थे। इसमें कहा गया कि 2025 के दौरान 12 हथियार तैनात किए गए, जबकि शेष हथियार रिजर्व में रखे गए।
SIPRI ने नोट किया कि यह पहली बार है जब भारत के शस्त्रागार को आंशिक रूप से परिचालन रूप से तैनात बताया गया है, बजाय इसके कि यह पूरी तरह से स्टॉकपाइल्ड हो, जो यह दर्शाता है कि बल को कैसे बनाए रखा जाता है।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत ने वर्ष के दौरान अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार करना जारी रखा और नए वितरण प्रणालियों पर काम किया।
इसमें यह भी जोड़ा गया कि देश की आधुनिकीकरण योजनाएं लंबी दूरी के हथियारों पर अधिक केन्द्रित होती जा रही हैं जो पूरे चीन को कवर करने में सक्षम हैं, जबकि सैन्य योजना पाकिस्तान को ध्यान में रखकर जारी है।
SIPRI ने अग्नि-वी मिसाइल के विकास का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया कि एक लंबी दूरी का संस्करण चीन, भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा परमाणु संतुलन को बदल सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, एशिया और ओशिनिया ने 2025 में निरंतर सैन्य निर्माण और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा देखी। इसमें मई 2025 में भारत-पाकिस्तान सैन्य संकट का उल्लेख किया गया, जहां साइबर ऑपरेशनों का उपयोग पारंपरिक सैन्य गतिविधि के साथ किया गया।
ईयरबुक ने इंडो-पैसिफिक में पनडुब्बी-आधारित परमाणु वितरण प्रणालियों के बढ़ते उपयोग को भी उजागर किया, जिसमें भारत भी शामिल है।
SIPRI आकलन से पता चलता है कि भारत ने 2025 में रक्षा खर्च बढ़ाया जबकि अपने परमाणु शस्त्रागार और मिसाइल कार्यक्रमों पर काम जारी रखा, साथ ही क्षेत्र में व्यापक सैन्य विकास भी हो रहे हैं।
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प्रकाशित:: 10 Jun 2026, 6:00 pm IST

Team Angel One
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