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बॉन्ड का टैक्सेशन: विभिन्न प्रकार के बॉन्ड पर कैसे टैक्स लगाए जाते हैं?

6 min read•Updated on 10th Jun, 2026•by Team Angel One
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भारत में बंधपत्रों पर टैक्स लगाने के बारे में जानें: ब्याज से आय से लेकर पूंजी अभिलाभ तक। विभिन्न प्रकार के बॉन्ड तथा उनके टैक्स प्रभावों के बारे में जानें। बॉन्ड लंबे समय से व्यक्तिगत और संस्थागत निवेशकों के लिए एक पसंदीदा वित्तीय साधन रहा है। ये निश्चित आय वाले उपकरण स्थिरता प्रदान करते हैं और अन्य निवेश विकल्पों की तुलना में कम जोखिम वाले होते हैं। तथापि, बॉन्ड में निवेश करके मार्केट की अस्थिरता से निजात पाने के लिए बॉन्ड में निवेश करने वाले निवेशकों को अपनी टैक्स देयता के बारे में जानना चाहिए। इस लेख में, भारत में बॉन्ड पर लगने वाले टैक्स के बारे में और उन बातों के बारे में जानें जिन पर आपको निवेश करने से पहले ध्यान देना जरुरी है। ट्रेडर्स के लिए टैक्सेशन के बारे में और पढ़ें

बॉन्ड क्या हैं?

बॉन्ड एक ऐसा ऋण साधन है जिसके माध्यम से एक कंपनी या सरकार आपसे, एक निवेशक से पैसे उधार लेती है। इसके बदले, वे मूल राशि पर ब्याज देते हैं। खरीद के समय बॉन्ड की परिपक्वता तिथि बॉन्ड पर अंकित कर दी जाती है। आप ब्याज और पूंजी अभिलाभ के माध्यम से बॉन्ड पर आय अर्जित कर सकते हैं। ब्याज वह राशि है जो नियमित अंतराल पर दी जाती है जो मूल राशि के सहमत प्रतिशत के आधार पर प्रदान की जाती है। पूंजी अभिलाभ, परिपक्वता के बाद बॉन्ड बेचने पर उत्पन्न लाभ होते हैं।

भारत में बॉन्ड का टैक्सेशन

भारत में बॉन्ड पर दो प्रमुख कारकों अर्थात बॉन्ड के प्रकार और उसकी होल्डिंग अवधि के आधार पर टैक्स लगाया जाता है। बॉन्ड पर ब्याज और पूंजीगत लाभ दोनों के लिए निम्न के अनुसार टैक्स लगता है:

  • ब्याजः बॉन्ड पर ब्याज आय पर आपकी आयकर स्लैब के अनुसार आपकी कुल आय में जोड़कर टैक्स लगाया जाता है।
  • कैपिटल गेन: बॉन्ड पर कैपिटल गेन पर बॉन्ड के प्रकार के आधार पर टैक्स लगाया जाता है:
  • असूचीबद्ध बॉन्ड: 3 वर्ष से अधिक समय के लिए धारित बंधपत्रों पर लाभ को दीर्घकालिक पूंजी लाभ (एलटीसीजी) माना जाता है। इन पर बिना इंडेक्सेशन लाभ के 20% पर कर लगाया जाता है। 3 वर्ष से कम समय के लिए बंधपत्रों से प्राप्त लाभ को शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (एसटीसीजी) माना जाता है और आपके आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगाया जाता है।
  • सूचीबद्ध बॉन्ड: 1 वर्ष से अधिक समय के लिए धारित सूचीबद्ध बॉन्ड पर अर्जित लाभ पर एलटीसीजी (LTCG) कर लगाया जाता है और इन्डेक्सेशन लाभ के बिना 10% के दर पर कर लगाया जाता है। 1 वर्ष से कम समय के लिए बॉन्ड से प्राप्त लाभ एसटीसीजी (STCG) हैं, जिन पर आपके आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगाया जाता है।

भारत में बॉन्ड के प्रकार और उनका टैक्सेशन

  1. नियमित टैक्स योग्य बॉन्ड

जैसा कि नाम से पता चलता है, ये टैक्स योग्य बॉन्ड हैं। इन नियमित टैक्स योग्य बॉन्ड पर अर्जित ब्याज पर निवेशक के आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगाया जाता है और इन बॉन्ड पर लगाया जाने वाला पूंजी अभिलाभ टैक्स बॉन्ड की होल्डिंग अवधि पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, आपने 10% ब्याज दर पर टैक्स योग्य सूचीबद्ध बॉन्ड में ₹5,00,000 का निवेश किया है और परिपक्वता 5 वर्ष है। इस मामले में, आप प्रति वर्ष ब्याज के रूप में ₹50,000 कमाते हैं, जिसे आपके कुल आय में जोड़ा जाता है और आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगाया जाता है। पूंजी अभिलाभ के मामले में, सूचीबद्ध बॉन्ड का टैक्स होल्डिंग अवधि के अनुसार अलग-अलग होता है। यदि बॉन्ड का परिपक्वता मूल्य ₹6,00,000 है, तो पूंजीगत लाभ ₹1,00,000 है। चूंकि यह एक सूचीबद्ध बॉन्ड है जो एक वर्ष से अधिक समय से धारित किया गया है, इसलिए इसपर इंडेक्सेशन लाभ के बिना ₹1,00,000 के लाभ पर 10% टैक्स लगाया जाता है।

  1. टैक्स फ्री बॉन्ड

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) और सरकार टैक्स फ्री बॉन्ड जारी करती है। इन बॉन्ड से प्राप्त राशि का उपयोग रेलवे, राजमार्ग, ग्रामीण और शहरी विकास आदि जैसी परियोजनाओं के लिए किया जाता है। इन बॉन्ड पर अर्जित ब्याज पर टैक्स नहीं लगाया जाता है। तथापि, इन बॉन्ड से पूंजी अभिलाभ पर होल्डिंग अवधि, एलटीसीजी (LTCG) या एसटीसीजी (STCG) के अनुसार कर लगाया जाता है।

  1. टैक्स-सेविंग बॉन्ड

जैसा कि नाम से पता चलता है, ये बॉन्ड निवेशकों को टैक्स बचाने में मदद करते हैं। टैक्स बचत बॉन्ड भारत सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं। इन बॉन्ड पर ब्याज दर भारत सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है और वे न्यूनतम 5 वर्षों की लॉक-इन अवधि के साथ आते हैं। टैक्स सेविंग बॉन्ड पर ब्याज आय निवेशक के आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स योग्य होती है। पूंजी अभिलाभ पर होल्डिंग अवधि के आधार पर टैक्स लगाया जाता है, जो एलटीसीजी (LTCG) है, क्योंकि इन बॉन्ड में लॉक-इन अवधि होती है। आप सेक्शन 80CCF के तहत टैक्स-सेविंग बॉन्ड पर किए गए अपने निवेश पर ₹20,000 तक की टैक्स कटौती का क्लेम कर सकते हैं। ये टैक्स बचत बॉन्ड दीर्घकालिक पूंजी परिसंपत्तियों वाले व्यक्तियों के लिए फायदेमंद हैं। सेक्शन 54EC के अनुसार, अगर आपके पास बिल्डिंग, भूमि या दोनों जैसी लॉन्ग-टर्म परिसंपत्ति है, तो आप इन परिसंपत्तियों के ट्रांसफर से कैपिटल गेन पर होने वाले टैक्स पर बचत कर सकते हैं, यदि,

  • दीर्घकालिक परिसंपत्तियों से पूंजी अभिलाभ आस्तियों के अंतरण की तारीख से 6 महीनों के भीतर टैक्स-बचत बॉन्ड में निवेश किया जाता है।
  • लाभ को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI), रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन (REC), इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC) या पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PFC) द्वारा जारी बॉन्ड में निवेश किए जाते हैं।
  • अधिकतम निवेश राशि ₹50 लाख से कम होनी चाहिए।
  1. जीरो-कूपन बॉन्ड

बॉन्ड पर अर्जित ब्याज को कूपन के रूप में जाना जाता है। जीरो-कूपन बॉन्ड वे बॉन्ड होते हैं जो बॉन्ड पर ब्याज नहीं देते। लेकिन ये बॉन्ड छूट पर जारी किए जाते हैं। तथापि, परिपक्वता पर, निवेशक को बॉन्ड की पूरी फेस वैल्यू मिलती है। उदाहरण के लिए, आपने ₹25,000 के फेस वैल्यू वाले जीरो-कूपन बॉन्ड में निवेश किया है। निर्गम मूल्य ₹10,000 है। इसका मतलब है कि आपको रु. ₹15,000 की छूट मिली है। बॉन्ड की परिपक्वता पर, आपको ₹25,000 की पूरी राशि प्राप्त होगी। चूंकि कोई ब्याज नहीं है, इसलिए कोई टैक्स नहीं लगाया जाता है। इन बॉन्ड पर आपको जो पूंजी अभिलाभ प्राप्त होता है, उस पर होल्डिंग अवधि के अनुसार टैक्स दिया जाता है। ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी), नाबार्ड आदि द्वारा ये बॉन्ड जारी किए जाते हैं।

  1. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB)

सरकार द्वारा समर्थित ये बॉन्ड निवेशकों को भौतिक रूप से सोना खरीदे बगैर सोने में निवेश करने की अनुमति देते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा एसजीबी (SGB) जारी किए जाते हैं और उन्हें सोने के ग्राम में वर्गीकृत किया जाता है। एसजीबी (SGB) न केवल पूंजीगत लाभ प्रदान करते हैं बल्कि प्रारंभिक निवेश पर 2.5% प्रति वर्ष का एक निश्चित ब्याज भी देते हैं, जिसका भुगतान अर्द्धवार्षिक किया जाता है। ये बॉन्ड सोने की दरों के अनुसार उतार-चढ़ाव के अधीन होते हैं। ये बांड 8 वर्ष की परिपक्वता अवधि के साथ आते हैं। यद्यपि, आप केवल ब्याज भुगतान की तिथि पर 5 वर्ष के बाद बॉन्ड से बाहर निकल सकते हैं। टैक्सेशन के संबंध में, यहां कुछ बातों को ध्यान में रखना चाहिए:

  • इन स्वर्ण बॉन्ड पर अर्जित ब्याज पर आपके आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगाया जाता है।
  • इन बॉन्ड द्वारा अर्जित पूंजी अभिलाभों पर होल्डिंग अवधि के आधार पर टैक्स लगाया जाता है। यदि इन्हें परिपक्वता तक धारित किया जाता है तो इन बॉन्ड को पूंजी अभिलाभ टैक्स से छूट दी जाती है। हालांकि, एलटीसीजी (LTCG) पर 20% की दर से इंडेक्सेशन लाभ के साथ टैक्स लगाया जाता है यदि वे 5 वर्ष के बाद और खरीद की तिथि के 8 वर्ष से पहले बेचे जाते हैं।

यहां भारत में बॉन्ड के टैक्सेशन को स्पष्ट रूप से समझने के लिए एक तालिका दी गई है।

बॉन्ड का प्रकार ब्याज का टैक्सेशन पूंजीगत लाभों पर टैक्स
नियमित टैक्स योग्य बॉन्ड आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है
  • सूचीबद्ध बॉन्ड: एलटीसीजी (LTCG) पर 10% की दर पर बिना इंडेक्सेशन लाभ के टैक्स लगाया जाता है। एसटीसीजी (STCG) पर आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगाया जाता है।
  • अनलिस्ट किए गए बॉन्ड: एलटीसीजी (LTCG) पर बिना इंडेक्सेशन लाभ के 20% की दर पर टैक्स लगाया जाता है। एसटीसीजी (STCG) पर आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगाया जाता है।
टैक्स-फ्री बॉन्ड ब्याज आय पर टैक्स नहीं लगता होल्डिंग अवधि के आधार पर टैक्स लगाया जाता है।
टैक्स-सेविंग बॉन्ड आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है होल्डिंग अवधि के आधार पर टैक्स लगता है। कटौती के लिए निवेश का क्लेम किया जा सकता है सेक्शन 80CCF के तहत, अधिकतम ₹20,000।
जीरो-कूपन बॉन्ड कोई ब्याज नहीं, कोई टैक्स नहीं होल्डिंग अवधि के आधार पर टैक्स लगता है।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है यदि परिपक्वता तक धारित किया जाए तो टैक्स से छूट। यदि 5 वर्ष के बाद लेकिन 8 वर्ष से पहले बेचा जाता है तो इंडेक्सेशन लाभ के साथ 20% का एलटीसीजी (LTCG) टैक्स लागू होता है।

निष्कर्ष बॉन्ड स्थिर रिटर्न प्रदान करते हैं और कम जोखिम वाले निवेश होते हैं। तथापि, बॉन्ड में शामिल टैक्स को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है, जो आपके अंतिम रिटर्न को प्रभावित कर सकता है। कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से बात करें। स्टॉक, म्यूचुअल फंड आदि जैसे अन्य निवेश विकल्पों के बारे में जानने के लिए एंजल वन ऐप का उपयोग करें। आज ही मुफ्त में एंजल वन पर डीमैट अकाउंट खोलें।

 

FAQs

नहीं , टैक्स - फ्री बॉन्ड में ब्याज आय पर टैक्स नहीं होता है , लेकिन उन्हें बेचने से मिलने वाले पूंजीगत लाभ अभी भी होल्डिंग अवधि के आधार पर टैक्स के अधीन हो सकते हैं।
बॉन्ड में न्यूनतम निवेश ₹1,000 है और इसमें निवेश की अधिकतम सीमा नहीं है। यद्यपि , अपने निवेश के उद्देश्य पर विचार करें और उसके अनुसार निवेश करें।
यदि आप 5 वर्ष के बाद लेकिन पूर्ण 8- वर्ष की परिपक्वता से पहले एसजीबी (SGB) से बाहर निकलते हैं , तो बिक्री से होने वाले दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ ( एलटीसीजी ) पर इंडेक्सेशन लाभ के साथ 20% की दर से कर लगाया जा सकता है।
टैक्स फ्री बॉन्ड पर पूंजी अभिलाभ पर होल्डिंग अवधि के अनुसार टैक्स लगाया जाता है। एलटीसीजी (LTCG) पर बिना इंडेक्सेशन लाभ के 10% की दर पर टैक्स लगाया जाता है। एसटीसीजी (STCG) पर आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगाया जाता है।

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