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क्या आईटीआर में एफ&ओ लॉसेस दिखाना जरूरी है?

6 min readUpdated on 5th Aug, 2026by Angel One
कई ट्रेडर्स यह मान लेते हैं कि आईटीआर में केवल मुनाफा दिखाना जरूरी है और एफ&ओ में हुए नुकसान की जानकारी देने की आवश्यकता नहीं होती। इस लेख में बताया गया है कि आईटीआर में एफ&ओ लॉसेस दिखाना क्यों जरूरी है, इन्हें किस आईटीआर फॉर्म में और कैसे दिखाया जाता है
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भारत में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस  ट्रेडिंग तेजी से लोकप्रिय हुई है। हालांकि ट्रेडिंग से होने वाला रोमांच अपनी जगह है, लेकिन इससे जुड़े टैक्स नियम अक्सर ट्रेडर्स को उलझन में डाल देते हैं। रिटेल ट्रेडर्स के बीच एक आम धारणा है कि, "अगरएफ&ओ में नुकसान हुआ है, तो उसे आईटीआर में दिखाने की जरूरत नहीं है। आयकर विभाग को केवल मुनाफे से मतलब होता है।"

यह गलतफहमी आगे चलकर डिफेक्टिव रिटर्न, आयकर विभाग के नोटिस और सबसे बड़ी बात, भविष्य के मुनाफे से इस नुकसान को सेट ऑफ करने का अधिकार खोने जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है। टैक्स नियमों के अनुसार आपकी ट्रेडिंग एक बिजनेस मानी जाती है। ऐसे में बिजनेस में मुनाफा हो या नुकसान, दोनों की जानकारी आयकर विभाग को देना जरूरी होता है।

यदि आपके मन में भी यह सवाल है कि क्या आईटीआर में एफ&ओ लॉसेस दिखाना वास्तव में अनिवार्य है, तो इसका सीधा जवाब है, हां। हालांकि इसके पीछे की पूरी वजह समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि इस नुकसान को भविष्य में टैक्स बचाने के लिए कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है।

मुख्य बातें

  • बिजनेस इनकम: एफ&ओ ट्रेडिंग को "नॉन-स्पेक्युलेटिव बिजनेस इनकम" माना जाता है, न कि कैपिटल गेन्स।
  • मैंडेटरी रिपोर्टिंग: भविष्य के मुनाफे से सेट ऑफ करने के लिए एफ&ओ लॉसेस को अधिकतम 8 असेसमेंट ईयर तक कैरी फ़ॉरवर्ड किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए उन्हें आईटीआर में दिखाना जरूरी है।
  • करेक्ट फॉर्म: एफ&ओ लॉसेस दिखाने के लिए सामान्यतः आईटीआर-3 का उपयोग किया जाता है। आईटीआर-4 केवल कुछ विशेष प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन मामलों (आमतौर पर मुनाफे की स्थिति में) लागू होता है।
  • ऑडिट रूल्स: यदि आपका टर्नओवर ₹10 करोड़ से अधिक है, या आपने प्रिजम्प्टिव इनकम की निर्धारित सीमा (6%) से कम आय घोषित की है और आपकी कुल आय बेसिक टैक्स छूट सीमा से अधिक है, तो टैक्स ऑडिट कराना जरूरी हो सकता है।

आईटीआर में एफ&ओ लॉसेस क्या होते हैं?

आईटीआर सही तरीके से दाखिल करने के लिए सबसे पहले अपनी आय की सही श्रेणी तय करना जरूरी है।

भारत में डेरिवेटिव्स (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) में ट्रेडिंग को एक वैध बिजनेस गतिविधि माना जाता है। इंट्राडे इक्विटी ट्रेडिंग, जिसे "स्पेक्युलेटिव बिजनेस" माना जाता है, उससे अलग एफ&ओ ट्रेडिंग को "नॉन-स्पेक्युलेटिव बिजनेस इनकम" की श्रेणी में रखा गया है।

यह अंतर समझना बेहद महत्वपूर्ण है।

स्पेक्युलेटिव लॉस (इंट्राडे): इसे केवल स्पेक्युलेटिव प्रॉफिट से ही सेट ऑफ किया जा सकता है।

नॉन-स्पेक्युलेटिव लॉस (एफ&ओ): इसे किसी भी अन्य बिजनेस इनकम के साथ सेट ऑफ किया जा सकता है। इसके अलावा रेंटल इनकम या कैपिटल गेन्स जैसी अन्य आय के साथ भी समायोजित किया जा सकता है, लेकिन सैलरी इनकम के साथ नहीं।

जब आप आईटीआर में एफ&ओ लॉसेस दिखाते हैं, तो आप मूल रूप से आयकर विभाग को यह बता रहे होते हैं कि, "मैं ट्रेडिंग का बिजनेस करता हूं और इस वर्ष मेरे बिजनेस में नुकसान हुआ है।"

आईटीआर में एफ&ओ लॉसेस दिखाना क्यों जरूरी है?

नुकसान दिखाना पहली नजर में भले ही अच्छा न लगे, लेकिन टैक्स के नजरिए से यह एक समझदारी भरा वित्तीय फैसला है।

  1. "कैरीफॉरवर्ड" का फायदा: यह इसका सबसे बड़ा लाभ है। यदि आपने इस वर्ष ₹2 लाख का एफ&ओ लॉस दिखाया है, तो आयकर विभाग आपको इस नुकसान को 8 असेसमेंट ईयर तक कैरी फॉरवर्ड करने की अनुमति देता है।

सिनेरियो: अगले वर्ष आपको ₹5 लाख का मुनाफा होता है।

रिजल्ट: आप पुराने ₹2 लाख के नुकसान को ₹5 लाख के मुनाफे से घटा सकते हैं। ऐसे में आपको केवल ₹3 लाख पर टैक्स देना होगा।

ध्यान रखें: लॉस को कैरी फ़ॉरवर्ड करने का लाभ तभी मिलेगा, जब आपने आईटीआर समय सीमा के भीतर (आमतौर पर 31 जुलाई तक) दाखिल किया हो।

2. इनकम के सोर्स को समझाने में आसानी

यदि अगले वर्ष आपको ट्रेडिंग में बड़ा मुनाफा होता है और उससे आप कोई संपत्ति खरीदते हैं, तो आयकर विभाग पूछ सकता है कि यह पैसा कहां से आया। ऐसे में नुकसान वाले वर्षों सहित आपकी ट्रेडिंग हिस्ट्री यह समझाने में मदद करती है कि आपकी इनकम का सोर्स क्या है और आप नियमित रूप से ट्रेडिंग करते हैं।

3.डिफेक्टिव रिटर्न से बचाव

अब एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (एआईएस) में आपके सभी बड़े वित्तीय लेनदेन दर्ज होते हैं। यानी आयकर विभाग को पता होता है कि आपने ट्रेडिंग की है। यदि आपके एआईएस में ₹50 लाख का टर्नओवर दिख रहा है, लेकिन आईटीआर में आपने "नो बिजनेस इनकम" दिखाया है, तो इस मिसमैच के कारण आपको आयकर विभाग से नोटिस मिल सकता है।

यह भी पढ़ें: आईटीआर क्या है?

आईटीआर में एफ&ओ लॉसेस कहां और कैसे दिखाएं?

सही आईटीआर फॉर्म चुनना इस प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। चूंकि एफ&ओ से होने वाली आय बिजनेस इनकम मानी जाती है, इसलिए इसके लिए आईटीआर-1 (सहज) या आईटीआर-2 का उपयोग नहीं किया जा सकता।

विकल्प 1: आईटीआर-3 (सबसे सामान्य विकल्प)

यह बिजनेस या प्रोफेशन से आय वाले व्यक्तियों और एचयूएफ के लिए लागू होता है।

कहां दिखाएं:

"प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट (पी&एल)" शेड्यूल में जाएं।

कैसे भरें:

अपना टर्नओवर दर्ज करें (यानी एब्सोल्यूट प्रॉफिट + एब्सोल्यूट लॉस का कुल योग)। इसके बाद ब्रोकरेज, इंटरनेट और डेटा फीड जैसी लागत दर्ज करें। इसके बाद बचा हुआ नेट रिजल्ट (लॉस) अपने आप "बीपी" (बिजनेस एंड प्रोफेशन) शेड्यूल में चला जाएगा।

विकल्प 2: आईटीआर-4 (प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन)

यह सेक्शन 44एडी (प्रिजम्प्टिव स्कीम) चुनने वाले करदाताओं के लिए है।

शर्त:

इसमें आपको डिजिटल रिसीट्स होने पर आमतौर पर टर्नओवर का 6% और नॉन-डिजिटल रिसीट्स होने पर 8% मुनाफे के रूप में घोषित करना होता है।

समस्या:

प्रिजम्प्टिव स्कीम के तहत आईटीआर-4 में लॉस दिखाना आसान नहीं होता। ऐसा करने पर स्क्रूटिनी या टैक्स ऑडिट की स्थिति बन सकती है। यदि आपको लॉस हुआ है और आप उसे कैरी फ़ॉरवर्ड करना चाहते हैं, तो लगभग हर स्थिति में आईटीआर-3 ही

क्या एफ&ओ लॉसेस को कैरी फ़ॉरवर्ड या सेट ऑफ किया जा सकता है?

अन्य प्रकार के नुकसान की तुलना में एफ&ओ लॉसेस के मामले में आयकर नियम अपेक्षाकृत अधिक राहत देते हैं।

1. सेटऑफ (उसी वित्तीय वर्ष में)

जिस वर्ष लॉस हुआ है, उसी वर्ष आप उसे इन आय के साथ सेट ऑफ कर सकते हैं:

  • अन्य बिजनेस से होने वाली आय (जैसे कपड़ों का कारोबार या कंसल्टेंसी)
  • रेंटल इनकम (हाउस प्रॉपर्टी)
  • कैपिटल गेन्स (लॉन्ग टर्म या शॉर्ट टर्म)
  • इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज़ (जैसे ब्याज की आय)

अपवाद: एफ&ओ लॉसेस को सैलरी इनकम के साथ सेट ऑफ नहीं किया जा सकता।

2. कैरीफ़ॉरवर्ड (आने वाले वर्षों के लिए)

यदि उसी वर्ष पूरा लॉस सेट ऑफ नहीं हो पाता, तो बची हुई राशि को आगे के वर्षों के लिए कैरी फ़ॉरवर्ड किया जा सकता है।

अवधि: अधिकतम 8 असेसमेंट ईयर्स तक।

शर्त: आने वाले वर्षों में इस लॉस को केवल बिजनेस इनकम (स्पेक्युलेटिव और नॉन-स्पेक्युलेटिव दोनों) के साथ ही सेट ऑफ किया जा सकता है। बाद के वर्षों में इसे हाउस प्रॉपर्टी या किसी अन्य आय के साथ समायोजित नहीं किया जा सकता।

यह भी पढ़ें: कैपिटल गेन टैक्स क्या है?

आईटीआर में एफ&ओ लॉसेस नहीं दिखाने के क्या नुकसान हैं?

आईटीआर में एफ&ओ लॉसेस नहीं दिखाना टैक्स नियमों के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता है।

टैक्स बेनिफिट का नुकसान:

यदि आप एफ&ओ लॉसेस की जानकारी नहीं देते हैं, तो भविष्य में होने वाले मुनाफे से उसे सेट ऑफ करने का अधिकार हमेशा के लिए खत्म हो सकता है। उदाहरण के लिए, इस वर्ष का ₹2 लाख का लॉस आगे किसी काम नहीं आएगा और अगले वर्ष आपको अधिक टैक्स देना पड़ सकता है।

डिफेक्टिव रिटर्न का नोटिस:

अब आयकर विभाग एसटीटी (सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स) के डेटा के जरिए आपके टर्नओवर की जानकारी रखता है। यदि आपके आईटीआर और एक्सचेंज के वास्तविक डेटा में अंतर पाया जाता है, तो सेक्शन 139(9) के तहत डिफेक्टिव रिटर्न का नोटिस मिल सकता है।

अंडर-रिपोर्टिंग पर पेनल्टी:

यदि आयकर विभाग यह मानता है कि आपने अपनी आय से जुड़ी जानकारी छिपाई है (भले ही वह लॉस ही क्यों न हो, जिससे आपकी टैक्स देनदारी प्रभावित होती हो), तो बचाए गए टैक्स का 50% से 200% तक पेनल्टी लग सकती है।

एफ&ओ ट्रेडर्स के लिए टैक्स ऑडिट और कम्प्लायंस रूल्स

आमतौर पर बिजनेस टर्नओवर ₹1 करोड़ से अधिक होने पर टैक्स ऑडिट की जरूरत होती है। हालांकि, डिजिटल ट्रांजैक्शंस को बढ़ावा देने के लिए, यदि आपके 95% रिसीट्स/पेमेंट्स डिजिटल माध्यम से होते हैं (जैसा कि एफ&ओ ट्रेडिंग में होता है), तो यह सीमा बढ़कर ₹10 करोड़ हो जाती है।

लॉस होने पर टैक्स ऑडिट कब जरूरी होता है?

यहीं पर नियम थोड़ा अलग हो जाता है।

आपको सीए से अपनी बुक्स ऑफ अकाउंट्स का टैक्स ऑडिट कराना होगा, यदि:

  • आपने अपने टर्नओवर के 6% से कम मुनाफा घोषित किया है (इसमें लॉस घोषित करना भी शामिल है)। और
  • आपकी टोटल इनकम (सैलरी + रेंट + इंटरेस्ट आदि) बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट (चुने गए टैक्स रिजीम के अनुसार ₹2.5 लाख या ₹3 लाख) से अधिक है।

यदि ये दोनों शर्तें पूरी होती हैं, तो टर्नओवर केवल ₹50 लाख होने पर भी आपको बुक्स ऑफ अकाउंट्स रखना और टैक्स ऑडिट कराना अनिवार्य होगा।

आईटीआर में एफ&ओ लॉसेस दाखिल करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  1. टर्नओवर का सही कैलकुलेशन करें

एफ&ओ में टर्नओवर, कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू नहीं होता। इसकी गणना एब्सोल्यूट प्रॉफिट और एब्सोल्यूट लॉस के कुल योग के आधार पर की जाती है।

उदाहरण:

ट्रेड A: प्रॉफिट ₹5,000

ट्रेड B: लॉस ₹4,000

टर्नओवर = ₹5,000 + ₹4,000 = ₹9,000 (₹1,000 नहीं)

  1. सभी जरूरी खर्चों को ठीक से क्लेम करें

चूंकि एफ&ओ ट्रेडिंग को बिजनेस माना जाता है, इसलिए इससे जुड़े कई खर्चों की कटौती का दावा किया जा सकता है। इसमें ब्रोकरेज, जीएसटी, इंटरनेट चार्जेज, एडवाइजरी फीस और यहां तक कि ट्रेडिंग से जुड़ी किताबों का खर्च भी शामिल हो सकता है। इससे आपका टैक्सेबल प्रॉफिट कम हो सकता है या वैध बिजनेस लॉस बढ़ सकता है।

  1. समय पर आईटीआर दाखिल करें

आमतौर पर आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई होती है। यदि आप तय समय के बाद बिलेटेड रिटर्न दाखिल करते हैं, तो रिटर्न तो स्वीकार हो जाएगा, लेकिन आप अपने लॉसेस को आगे के वर्षों के लिए कैरी फ़ॉरवर्ड नहीं कर पाएंगे।

यह भी पढ़ें: जीएसटी क्या है?

निष्कर्ष

एफ&O ट्रेडिंग केवल चार्ट्स और कैंडल्स तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें टैक्स नियमों का सही पालन करना भी उतना ही जरूरी है। यदि आप कानून का पालन करना चाहते हैं और भविष्य में टैक्स बचत का लाभ लेना चाहते हैं, तो आईटीआर में एफ&ओ लॉसेस की सही जानकारी देना जरूरी है।

आईटीआर-3 में सही तरीके से लॉस घोषित करके आप अपने मौजूदा वित्तीय नुकसान को भविष्य के लिए टैक्स बचत का अवसर बना सकते हैं। इसलिए लॉस से घबराएं नहीं। उसका सही रिकॉर्ड रखें, आईटीआर में उसे दर्ज करें और आने वाले वर्षों में उसका पूरा फायदा उठाएं।

FAQs

क्या एफ&ओ लॉसेस को अन्य प्रकार की आय के साथ सेट ऑफ किया जा सकता है?

हां। जिस वित्तीय वर्ष में एफ&ओ लॉस होता है, उसी वर्ष उसे रेंटल इनकम, कैपिटल गेन्स और इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज के साथ सेट ऑफ किया जा सकता है। हालांकि, इसे सैलरी इनकम के साथ सेट ऑफ नहीं किया जा सकता।

एफ&ओ लॉसेस दिखाने के लिए कौन-सा आईटीआर फॉर्म इस्तेमाल करना चाहिए?

आमतौर पर एफ&ओ लॉसेस दिखाने के लिए आईटीआर-3 सबसे उपयुक्त फॉर्म माना जाता है, क्योंकि इसमें बिजनेस इनकम और उससे जुड़े खर्चों की विस्तृत जानकारी दी जा सकती है। वहीं आईटीआर-4 मुख्य रूप से प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन (यानी तय प्रतिशत के आधार पर मुनाफा घोषित करने) का विकल्प चुनने वाले करदाताओं के लिए होता है।

एफ&ओ लॉसेस को कितने समय तक कैरी फ़ॉरवर्ड किया जा सकता है?

 

यदि एफ&ओ लॉसेस उसी वर्ष पूरी तरह सेट ऑफ नहीं हो पाते, तो उन्हें उस असेसमेंट ईयर के बाद आने वाले अधिकतम 8 असेसमेंट ईयर्स तक कैरी फ़ॉरवर्ड किया जा सकता है, जिसमें पहली बार उस नुकसान की गणना की गई थी।

क्या आईटीआर में एफ&ओ लॉसेस और इक्विटी या इंट्राडे लॉसेस का टैक्स नियम अलग होता है?

हां। इंट्राडे इक्विटी लॉसेस को स्पेक्युलेटिव लॉसेस माना जाता है और इन्हें केवल स्पेक्युलेटिव प्रॉफिट्स के साथ ही सेट ऑफ किया जा सकता है। वहीं एफ&ओ लॉसेस, नॉन-स्पेक्युलेटिव बिजनेस लॉसेस माने जाते हैं। इसलिए इन्हें अन्य बिजनेस इनकम, रेंटल इनकम और कुछ अन्य आय के साथ सेट ऑफ करने की सुविधा मिलती है।

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