NSE IPO: SEBI से मिली हरी झंडी; जानिए देश के सबसे बड़े आईपीओ से जुड़ी हर अहम जानकारी

बिजनेस डेस्क। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) को बाजार नियामक SEBI से ऑब्जर्वेशन लेटर (मंजूरी) मिल गया है। एक्सचेंज ने 17 जून 2026 को अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया था। SEBI की हरी झंडी मिलने के बाद अब NSE आईपीओ लॉन्च करने की अंतिम औपचारिकताओं में जुट गया है।
₹30,000 करोड़ का साइज: LIC और हुंडई से भी बड़ा इश्यू
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आईपीओ के जरिए बाजार से लगभग ₹30,000 करोड़ जुटाए जाने का अनुमान है। अगर आईपीओ इसी साइज में आता है, तो यह हुंडई मोटर इंडिया (₹27,859 करोड़) और LIC (₹20,557 करोड़) को पीछे छोड़कर भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ बन जाएगा।
पूरी तरह 'ऑफर फॉर सेल' (Pure OFS) होगा इश्यू
यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) पर आधारित होगा। इसके तहत NSE के मौजूदा शेयरधारक अपने 14.89 करोड़ (149 मिलियन) इक्विटी शेयर बेचेंगे, जो कंपनी की कुल पेड-अप कैपिटल का लगभग 6% हिस्सा है।
कंपनी को नहीं मिलेगा फंड: NSE कोई भी नया (Fresh) शेयर जारी नहीं कर रहा है। इसलिए आईपीओ से जुटने वाली पूरी रकम शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों की जेब में जाएगी, न कि एक्सचेंज के पास।
इश्यू डेट और प्राइस बैंड: आईपीओ खुलने की तारीख और प्राइस बैंड का ऐलान अभी होना बाकी है।
मार्केट शेयर में दबदबा और फाइनेंशियल परफॉर्मेंस
DRHP के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार के अलग-अलग सेगमेंट्स में NSE का वर्चस्व कायम है:
कैश इक्विटी मार्केट: 92.99%
इक्विटी फ्यूचर्स: 99.79%
इक्विटी ऑप्शंस: 74.71%
करेंसी फ्यूचर्स: 99.48%
वित्तीय स्थिति (FY26): वित्तीय वर्ष 2026 में NSE की कुल आय ₹18,713 करोड़ रही, जो पिछले साल (FY25) के ₹19,177 करोड़ से थोड़ी कम है। कंपनी का नेट प्रॉफिट (PAT) भी ₹12,188 करोड़ से घटकर ₹10,302 करोड़ और EBITDA ₹12,647 करोड़ से घटकर ₹11,098 करोड़ रहा। हालाँकि, एक्सचेंज की नेटवर्थ बढ़कर ₹31,870 करोड़ हो गई है और NSE पूरी तरह से कर्जमुक्त (Zero Debt) है।
कौन-कौन से बड़े शेयरधारक बेच रहे हैं अपनी हिस्सेदारी?
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) इस आईपीओ में सबसे बड़ा सेलर बनने जा रहा है, जो अपने 2.48 करोड़ (24.8 मिलियन) शेयर बेचेगा। इसके अलावा हिस्सेदारी बेचने वाले अन्य प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:
MS Strategic (मॉरीशस)
कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB)
अरंदा इन्वेस्टमेंट्स (Aranda Investments)
बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda)
स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया
(गौरतलब है कि NSE ने 2016 में भी आईपीओ लाने की कोशिश की थी, लेकिन को-लोकेशन और डार्क-फाइबर विवाद से जुड़ी विनियामक जांच के कारण योजना को टालना पड़ा था।)
निष्कर्ष
पुराने विवादों और लंबे इंतजार के बाद SEBI की मंजूरी मिलना NSE के लिस्टिंग सफर का सबसे बड़ा पड़ाव है। कागजी औपचारिकताएं पूरी होते ही प्राइमरी मार्केट के निवेशक देश के सबसे बड़े एक्सचेंज में हिस्सेदारी खरीदने का मौका पा सकेंगे।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल शैक्षणिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है। इसमें उल्लिखित प्रतिभूतियां (Securities) केवल उदाहरण के रूप में दी गई हैं और इन्हें किसी भी तरह की निवेश सलाह (Investment Advice) न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सभी संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें और अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।
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प्रकाशित:: 12 Sept 2026, 1:22 am IST

Team Angel One
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