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जियो के IPO की तैयारियों के बीच, जानें Elon Musk के Starlink से इसकी तुलना

द्वारा लिखित: Team Angel Oneअपडेट किया गया: 15 Oct 2026, 1:44 am IST
जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO को लेकर बाजार में जारी हलचल और भारत के सेटेलाइट इंटरनेट मार्केट में Starlink की संभावित एंट्री के बीच, आइए समझते हैं कि आखिर Starlink की तुलना जियो से किस तरह की जा सकती है।
जियो के IPO की तैयारियों के बीच, जानें Elon Musk के Starlink से इसकी तुलना
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भारत के उपग्रह (सेटेलाइट) इंटरनेट क्षेत्र में Starlink के कदम रखने की संभावना ने देश की दिग्गज टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो के साथ इसकी सेवाओं का मुकाबला देखने का मौका दिया है। हालांकि, दोनों ही कंपनियां इंटरनेट कनेक्टिविटी ही मुहैया कराती हैं, लेकिन उनकी तकनीक और इस्तेमाल के मुख्य क्षेत्र एक-दूसरे से काफी अलग हैं। इसके बावजूद, कुछ ब्रॉडबैंड सेगमेंट्स में Starlink सीधे तौर पर जियो को चुनौती दे सकता है।

इस लेख में हम कीमत, सेवा की उपलब्धता और ग्राहकों की जरूरतों जैसे अहम पहलुओं के आधार पर इन दोनों कंपनियों के बीच संभावित प्रतिस्पर्धा को समझेंगे।

क्या जियो और Starlink एक-दूसरे के सीधे प्रतिस्पर्धी हैं?

जियो का प्रस्तावित सेटेलाइट नेटवर्क उन इलाकों तक अपनी पहुंच बढ़ा सकता है, जहां अब तक इंटरनेट की उचित सुविधा नहीं पहुंच पाई है। इसके साथ ही, कीमत, सेवा की उपलब्धता और उपयोगकर्ताओं की जरूरतों के आधार पर कंपनी को Starlink से कड़े मुकाबले का सामना भी करना पड़ सकता है।

आने वाले समय में Starlink वास्तव में जियो की प्रतिद्वंद्वी कंपनी बनेगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत में Starlink की कमर्शियल सेवाएं कब शुरू होती हैं और दोनों कंपनियां आम लोगों तक अपनी सेवाओं की पहुंच किस हद तक बना पाती हैं।

आइए जानते हैं कि इन दोनों कंपनियों की तुलना मुख्य रूप से किन आधारों पर की जा सकती है:

1. जियो और Starlink की तकनीक

रिलायंस जियो और Starlink के बीच सबसे बड़ा अंतर इंटरनेट कनेक्टिविटी देने की उनकी तकनीक में है। जियो की मौजूदा मोबाइल और फाइबर ब्रॉडबैंड सेवाएं जमीनी इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर करती हैं, जिसमें मोबाइल टावर और ऑप्टिकल फाइबर केबल का नेटवर्क शामिल है। वहीं, SpaceX की Starlink सेवा विशेष यूजर टर्मिनल्स के जरिए ब्रॉडबैंड इंटरनेट देने के लिए पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit या LEO) में मौजूद सेटेलाइट्स के नेटवर्क का इस्तेमाल करती है।

हालांकि, जियो भी अब अपने जमीनी नेटवर्क से आगे बढ़कर विस्तार करने की योजना बना रहा है। India Today की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने लगभग 1,600 LEO सेटेलाइट्स और 23 ग्राउंड स्टेशनों वाले एक सेटेलाइट नेटवर्क का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य अपने मौजूदा मोबाइल और फाइबर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और उन दूर-दराज के इलाकों तक कनेक्टिविटी पहुंचाना है, जहां इंटरनेट की पहुंच अब भी सीमित है।

2. भारत में मासिक खर्च और शुरुआती सेटअप की लागत

Starlink और जियो की तुलना में कीमत एक बेहद अहम पहलू है खासकर भारतीय बाजार के लिहाज से, जहां मोबाइल डेटा प्लान काफी कम कीमतों पर आसानी से उपलब्ध हैं। जियो अलग-अलग बजट के हिसाब से मोबाइल इंटरनेट प्लान पेश करता है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, Starlink की सेटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवा का मंथली सब्सक्रिप्शन चार्ज लगभग ₹3,000 से ₹4,200 तक हो सकता है। इसके अलावा, ग्राहकों को हार्डवेयर किट की कीमत भी अलग से चुकानी होगी, जिससे नया कनेक्शन लेने का शुरुआती खर्च काफी बढ़ सकता है।

हालांकि, भारत में SpaceX की Starlink सेवा की आधिकारिक कमर्शियल दरों की पुष्टि अभी नहीं हुई है, क्योंकि सुरक्षा संबंधी अंतिम मंजूरियों और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया फिलहाल जारी है। दोनों सेवाओं की लागत में यह अंतर इस बात को प्रभावित कर सकता है कि ग्राहक अपनी लोकेशन, बजट और इंटरनेट की जरूरतों के हिसाब से कौन-सी सेवा चुनते हैं।

उपग्रह ब्रॉडबैंड पारंपरिक नेटवर्क को कहां चुनौती दे सकता है?

जियो और Starlink भले ही अलग-अलग तकनीकों पर काम करते हों, लेकिन कुछ ब्रॉडबैंड क्षेत्रों में उनकी सेवाओं के बीच सीधी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। इसकी संभावना तब और बढ़ सकती है, जब जियो अपने मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ सेटेलाइट कनेक्टिविटी का भी विस्तार करे। हालांकि, इस मुकाबले का दायरा काफी हद तक रेगुलेटरी मंजूरियों और बाजार में सेवाओं की कमर्शियल उपलब्धता पर निर्भर करेगा।

जियो IPO की मुख्य जानकारी

जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO 21 अक्टूबर, 2026 को खुलने और 23 अक्टूबर, 2026 को बंद होने की उम्मीद है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, इसकी संभावित लिस्टिंग तारीख 28 अक्टूबर, 2026 है।

शेयरों का प्राइस बैंड ₹1,150 से ₹1,220 प्रति शेयर रहने की उम्मीद है। IPO की प्रक्रिया 19 अक्टूबर, 2026 को एंकर बुक के साथ शुरू होगी।

निष्कर्ष

भारत में Starlink की एंट्री देश के ब्रॉडबैंड बाजार में एक नया आयाम जोड़ती है, जहां रिलायंस जियो पहले से ही अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। एक तरफ जहां जियो अपनी कनेक्टिविटी रणनीति में सेटेलाइट सेवाओं को शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ Starlink की बाजार में स्थिति रेगुलेटरी मंजूरियों, कमर्शियल कीमतों और सेवाओं की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।

प्रकाशित:: 15 Oct 2026, 1:42 am IST

Team Angel One

Team Angel One is a group of experienced financial writers that deliver insightful articles on the stock market, IPO, economy, personal finance, commodities and related categories.

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