म्यूचुअल फंड में रिस्कोमीटर क्या होता है?

6 min readUpdated on 8th Jun, 2026by Angel One
म्यूचुअल फंड रिस्कोमीटर, जोखिम स्तर के आधार पर म्यूचुअल फंड को श्रेणीबद्ध करता है, जिससे निवेशक समझ-बूझकर निर्णय ले पाते हैं। यह म्यूच्यूअल फंड स्कीम में प्रत्येक आस्ति वर्ग को अंक प्रदान करता है।
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आप ज्यादा संपत्ति अर्जित करने के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण से म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं, लेकिन इसमें जोखिम भी अंतर्निहित होते हैं। निवेश हेतु समझ-बूझकर निर्णय के लिए बाजार के संभावित अस्थिरता का आकलन करना महत्वपूर्ण होता है। इस कार्य में म्यूचुअल फंड रिस्कोमीटर की भूमिका महत्वपूर्ण होती है जिसे भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा अनिवार्य बनाया गया है। यह एक स्पष्ट और संक्षिप्त दृश्य सहायता के रूप में कार्य करता है जो निवेशकों को किसी विशेष म्यूचुअल फंड स्कीम से जुड़े जोखिम के स्तर के बारे में जानने में सहायता करने के लिए तैयार की गई है।

म्यूचुअल फंड में रिस्कोमीटर क्या होता है?

रिस्कोमीटर एक टूल है जो ग्राफ के रूप से एएमएफआई (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड इन इंडिया) के दिशानिर्देशों के आधार पर म्यूचुअल फंड से जुड़े जोखिम का प्रतिनिधित्व करता है, निवेशकों को संभावित अस्थिरता का आकलन करने और समझ-बूझकर निवेश निर्णय लेने में मदद करता है। यह म्यूच्यूअल फंड स्कीम के अंतर्गत निर्धारित प्रत्येक आस्ति वर्ग को जोखिम अंक प्रदान करता है।

रिस्कोमीटर का इतिहास

वर्ष 2015 से पूर्व, म्यूच्यूअल फंड के रिस्कोमीटर का वर्गीकरण मुख्य रूप से म्यूच्यूअल फंड के प्रकार के आधार पर किया गया, जैसे इक्विटी या डेट। इस दृष्टिकोण की सीमाएं थी क्योंकि इसमें फंड को बनाने वाली अंतर्निहित आस्तियों की जानकारी नहीं दी जाती थी। इस कमी को दूर करने के लिए सेबी ने 2015 में प्रारंभिक रिस्कोमीटर शुरू किया। प्रारंभ में इसने पांच विशिष्ट श्रेणियों वाले रंग-कोडित बक्सों की प्रणाली के माध्यम से जोखिम स्तर प्रदर्शित किए।

इसमें और सुधार की आवश्यकता को मान्यता प्रदान करते हुए सेबी ने 2020 में रिस्कोमीटर को बदल दिया। वर्तमान संस्करण छह विशिष्ट जोखिम स्तरों के साथ मीटर ग्राफिक का उपयोग करता है, जो म्यूचुअल फंड की जोखिम प्रोफाइल की ज्यादा स्पष्ट व्याख्या करता है। इस संवर्धित रिस्कोमीटर के उपयोग से निवेशक संभावित अस्थिरता के बारे में बेहतर तरीके से समझ सकते हैं जिसका किसी खास फंड में उन्हें सामना करना पड़ सकता है।

रिस्कोमीटर का जोखिम स्तर

सेबी-मैंडेटेड रिस्कोमीटर म्यूचुअल फंड को छह विशिष्ट जोखिम स्तरों में वर्गीकृत करता है जिनकी अपनी विशेषताएं होती हैं:

  1. निम्नः इस श्रेणी में प्रतिभूतियां एवं उत्पाद शामिल होते हैं जिनमें आय निधियां, गिल्ट फंड और निश्चित परिपक्वता योजनाएं शामिल हैं। इस केटेगरी के म्यूचुअल फंड को सबसे सुरक्षित विकल्प के रूप में देखा जाता है, जिससे यह आय के विश्वसनीय स्रोत की तलाश करने वाले निवेशकों के लिए उपयुक्त होता है।
  2. मध्यम रूप से कम: इस श्रेणी में हल्के हरे रंग में अल्प से मध्यम टर्म वाले बांड को दर्शाया जाता है। उन्हें सुरक्षित निवेश माना जाता है और उन लोगों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है जो दीर्घकाल के लिए निवेश करना चाहते हैं।
  3. मध्यम: इसका अर्थ यह है कि इस श्रेणी में मूलधन थोड़ा जोखिम पर होता है। आर्बिट्रेज फंड, मनी मार्केट फंड और हाइब्रिड डेट-ओरिएंटेड फंड जैसे निवेश फंड अर्द्ध-रुढ़िवादी निवेशक के लिए उपयुक्त होते हैं जो कम स्तर का जोखिम उठाते हुए सम्मानजनक लाभ बुक करना चाहते हैं।
  4. मध्यम उच्च: इस श्रेणी में अक्सर गोल्ड ईटीएफ, इंडेक्स फंड, विविध इक्विटी फंड और संतुलित इक्विटी-ओरिएंटेड फंड शामिल हैं। इस प्रकार के उत्पाद दीर्घकालिक धन सृजन के लिए आदर्श होते हैं। इन निधियों के माध्यम से इक्विटी में किए गए निवेश लार्ज-कैप बाजार से जुड़े होते हैं और मीटर के संतरे रंग की श्रेणी के अंतर्गत आते हैं।
  5. उच्च: इस श्रेणी में धन अत्यधिक जोखिम में होता है। इस श्रेणी के अंतर्गत माइक्रो कैप, अंतर्राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और विषयगत निधियां आती हैं। इस प्रकार के उत्पाद उन निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं जिन्हें अपने निवेश में शामिल उच्च जोखिम से कोई दिक्कत नहीं है और विस्तारित समय में वे धन निर्माण की उम्मीद रखते हैं।
  6. बहुत उच्च: यहां निवेशक को पता होता है कि वह अपना संपूर्ण धन या उसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा खो सकता है, लेकिन लंबे समय में संभावित लाभ को अधिकतम करने के लिए वह अत्यधिक जोखिम उठाने के लिए तैयार रहता है।

रिस्कोमीटर द्वारा मापे गए म्यूचुअल फंड में जोखिम का प्रकार

रिस्कोमीटर म्यूचुअल फंड की रिस्क प्रोफाइल का आकलन करने के लिए कई प्रकार के कारकों पर विचार करता है। म्यूचुअल फंड के प्रकार द्वारा वर्गीकृत कुछ प्रमुख जोखिमों की विवरणी यहां दी गई है:

  1. इक्विटी फंड:
  • बाजार जोखिम: यह शेयर बाजार में समग्र उतार-चढ़ाव को निर्दिष्ट करता है। इक्विटी फंड की राशि, जैसी कि उसकी प्रकृति है, का स्टॉक में भारी निवेश किया जाता है। जब स्टॉक मार्केट में डाउनटर्न आता है तो इक्विटी फंड का मूल्य बहुत कम हो जा सकता है।
  • प्रबंधन जोखिम: यह जोखिम निधि प्रबंधक के निवेश निर्णयों से उत्पन्न होता है। अच्छी तरह से विविधतापूर्ण पोर्टफोलियो के साथ भी, प्रबंधक के एक खराब निवेश रणनीति या कार्यान्वयन फंड के प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

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  1. डेट फंड:
  • तरलता जोखिम: यह उस जोखिम को निर्दिष्ट करता है जब कम ट्रेडिंग वॉल्यूम के कारण निवेशक अपनी म्यूचुअल फंड यूनिट को आसानी से नहीं बेच सकता है। डेट फंड, खास तौर पर वे जो अपनी राशि उस बांड में निवेश करते हैं जिनका ट्रेडिंग कम होता है, वे तरलता जोखिम के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं।
  • ब्याज दर जोखिम: डेट फंड, विशेषकर लंबी परिपक्वता अवधि वाले, ब्याज दर के उतार-चढ़ाव के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो कम ब्याज दरों वाले मौजूदा बांडों का मूल्य कम हो जा सकता है।
  • क्रेडिट जोखिम: यह वह जोखिम है जो किसी डेट इंस्ट्रूमेंट (जैसे बॉन्ड) का जारीकर्ता अपने पुनर्भुगतान दायित्वों को पूरा करने में चूक जाता है।

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  1. म्यूचुअल फंड में अन्य प्रकार के जोखिम:
  • रिबैलेंसिंग जोखिम: अपनी टार्गेट रिस्क प्रोफाइल बनाए रखने के लिए फंड के भीतर एसेट एलोकेशन को समय-समय पर समायोजित करने से संबंधित जोखिम।
  • संकेन्द्रण जोखिम: यह निधि से संबंधित जोखिम को निर्दिष्ट करता है जिसमें सीमित संख्या में प्रतिभूतियों या क्षेत्रों में महत्वपूर्ण निवेश होता है। यदि उन विशिष्ट आस्तियों या क्षेत्रों के निष्पादन में तेजी से गिरावट आती है, तो फंड का मूल्य अनुपातहीन ढंग से प्रभावित हो सकता है।
  • मुद्रा जोखिम: विदेशी मुद्रा दरों में उतार-चढ़ाव के कारण म्यूचुअल फंड के निवेश के मूल्य को प्रभावित करने वाला जोखिम। यह जोखिम विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले फंड के लिए प्रासंगिक है।
  • मुद्रास्फीति जोखिम: यह उस जोखिम को निर्दिष्ट करता है जहां मुद्रास्फीति के कारण आपके निवेश की क्रय शक्ति समय के साथ कम हो जाती है। यदि निवेश पर रिटर्न मुद्रास्फीति से अधिक नहीं होता है, तो निश्चित रिटर्न देने वाले डेट फंड मुद्रास्फीति जोखिम के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं।
  • अस्थिरता जोखिम: यह म्यूचुअल फंड के नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) में समग्र उतार-चढ़ाव को निर्दिष्ट करता है। मैक्रोइकनोमिक और माइक्रोइकनोमिक दोनों कारकों का ऐसे जोखिम पर प्रभाव पड़ सकता है।

म्यूचुअल फंड में रिस्कोमीटर के लाभ

  1. मानकीकृत दृष्टिकोण: रिस्कोमीटर म्यूच्यूअल फंड स्कीम से संबंधित जोखिम स्तर को व्यक्त करने के लिए एक मानक और सीधा तरीका प्रदान करता है। यह मानकीकरण निवेशकों को विभिन्न फंड में जोखिम स्तरों की तुलना करने में मदद करता है तथा उन्हें समझ-बूझ कर निवेश करने का निर्णय लेने में सहायता करता है।
  2. बढ़ी हुई पारदर्शिता: सेबी के आदेश को लागू करने के लिए रिस्कोमीटर को प्रत्येक योजना के जोखिम स्तर को प्रकट करने हेतु आस्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) की आवश्यकता होती है। यह पारदर्शिता एएमसी तथा निवेशकों के बीच विश्वास और स्पष्टता को बढ़ावा देती है।

रिस्कोमीटर की कमियां

  1. इक्विटी फंड वर्गीकरण: इसमेंकई इक्विटी फंड को 'बहुत अधिक जोखिम' श्रेणी में वर्गीकृत कर दिया जाता है, जो उनकी जोखिम प्रोफाइल को सही तरीके से प्रतिबिंबित नहीं करता। विभिन्न प्रकार के इक्विटी फंड, जैसे लार्ज-कैप और सेक्टोरल फंड में अलग-अलग जोखिम स्तर होते हैं, फिर भी उन्हें एक ही रिस्कोमीटर वर्गीकरण प्राप्त होता है।
  2. सीमित म्यूचुअल फंड चयन मार्गदर्शन: यद्यपि रिस्कोमीटर का उद्देश्य जोखिम मूल्यांकन को मानकीकृत करना होता है, किन्तु म्यूचुअल फंड चुनने का यही एकमात्र कारक नहीं होना चाहिए। निवेशकों को व्यापक चयन प्रक्रिया के लिए विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
  3. मुख्य जोखिमों की उपेक्षा करता हैः रिस्कोमीटर कुछ महत्वपूर्ण जोखिमों जैसे संकेन्द्रण जोखिम और फंड के कमजोर प्रदर्शन बेंचमार्क को अनदेखा करता है। ये जोखिम निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हैं लेकिन जोखिममापी के मूल्यांकन में प्रतिबिंबित नहीं होते।

निष्कर्ष

हालांकि रिस्कोमीटर म्यूचुअल फंड की रिस्क प्रोफाइल को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण टूल है, लेकिन जब आप निवेश करते हैं तो निर्णय लेने का यह एकमात्र कारक नहीं होना चाहिए। निवेश करने से पहले विचार करने योग्य कई अन्य पहलू हैं। खर्च अनुपात, परफॉर्मेंस वर्सस कैटेगरी, बेंचमार्क के अनुपात में प्रदर्शन, प्रबंधन के तहत आस्तियां, फंड मैनेजर की विशेषज्ञता आदि कुछ अतिरिक्त कारक हैं। निवेशकों को अपने निवेश लक्ष्यों को भी ध्यान में रखना होगा।

म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) वित्तीय बाजारों में निवेश करने का एक आसान और व्यवस्थित तरीका प्रदान करते हैं, जिसमें ज्यादा विशेषज्ञता या बड़ी पूंजी की जरूरत नहीं होती। निवेशक केवल ₹500 प्रति माह से सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) शुरू कर सकते हैं और रुपये की औसत लागत तथा कंपाउंडिंग की ताकत का फायदा उठा सकते हैं। एंजेल वन (Angel One) का आसान प्लेटफॉर्म आपको रिटर्न, जोखिम, एक्सपेंस रेशियो और रेटिंग के आधार पर फंड्स की तुलना करने में मदद करता है, ताकि आप अपने वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार सही स्कीम चुन सकें। पेपरलेस ऑनबोर्डिंग, तुरंत सिप सेटअप और आसान ट्रैकिंग के साथ, म्यूचुअल फंड में निवेश करना पहले से कहीं ज्यादा सरल हो गया है।

FAQs

भारत में इस्तेमाल किया जाने वाला रिस्कोमीटर पिछली अस्थिरता, परिसंपत्ति आवंटन और अंतर्निहित प्रतिभूतियों को म्यूच्यूअल फंड के जोखिम स्तर को निर्धारित करते समय ध्यान रखता है। यह निधियों को वर्गीकृत करने के लिए जोखिम स्केल का प्रयोग करता है, जिसमें अधिक जोखिम और कम जोखिम परिलक्षित होता है।
यद्यपि रिस्कोमीटर फंड के जोखिम प्रोफाइल के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है, निवेशकों को अपने निवेश लक्ष्यों, समय सीमा, निधि प्रबंधक की विशेषज्ञता और बेंचमार्क के विरुद्ध पिछले प्रदर्शन जैसे अन्य कारकों पर भी विचार करना चाहिए।
नहीं, रिस्कोमीटर मुख्य रूप से म्यूचुअल फंड स्कीम के अंतर्निहित जोखिमों का आकलन करता है। निवेशकों को बाहरी कारकों के बारे में जानकारी रखनी चाहिए जो उनके निवेश को प्रभावित कर सकते हैं तथा अपनी रणनीति में तदनुसार परिवर्तन करना चाहिए।
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