
4 प्रमुख बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, RBL बैंक, यस बैंक और स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, ने राइट टू इन्फॉर्मेशन एक्ट के तहत संवेदनशील विनियामक जानकारी के प्रकटीकरण पर आपत्ति जताई है| इन बैंकों ने सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमिशन का रुख किया जब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कहा कि डिफॉल्टर सूचियाँ, NPA, दंड और निरीक्षण रिपोर्टों जैसे रिकॉर्ड प्रकटीकरण के दायरे में आते हैं|
इनका तर्क था कि ऐसे प्रकटीकरण गोपनीय पर्यवेक्षी जानकारी को उजागर कर सकते हैं| अब मामले को निर्णय हेतु CIC की बड़ी पीठ को भेजा गया है|
RTI आवेदक धीरज मिश्रा, वथिराज, गिरीश मित्तल और राधा रमन तिवारी ने विस्तृत विनियामक प्रकटीकरण मांगते हुए RBI में अलग-अलग आवेदन दाखिल किए| इनकी मांगों में शीर्ष 100 NPA, यस बैंक के जानबूझकर डिफॉल्टर, और SBI व आरबीएल बैंक की निरीक्षण रिपोर्टों जैसी जानकारी शामिल थी|
इन्होंने वैधानिक निरीक्षण के निष्कर्षों के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा पर लगाए गए ₹4.34 करोड़ के मौद्रिक दंड से संबंधित दस्तावेज भी मांगे| इन आवेदनों का उद्देश्य बैंकिंग संचालन और विनियामक निगरानी में पारदर्शिता बढ़ाना था|
बैंकों का तर्क था कि मांगी गई जानकारी का प्रकटीकरण उनके व्यावसायिक हितों और प्रतिस्पर्धी स्थिति को नुकसान पहुंचा सकता है| उनका कहना था कि निरीक्षण रिपोर्टों और दंड विवरणों में संवेदनशील परिचालन डेटा होता है|
ऐसी जानकारी सार्वजनिक करना, उनके अनुसार, ग्राहक विश्वास को कमजोर कर सकता है और व्यावसायिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है| RBI द्वारा यह संकेत देने के बाद कि जानकारी RTI एक्ट के तहत प्रकटीकरण के दायरे में आती है, ये आपत्तियाँ CIC को सौंपी गईं|
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कहा कि आवेदकों द्वारा मांगी गई जानकारी RTI एक्ट के तहत प्रकटीकरण के दायरे में आती है. यह रुख वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही पर नियामक के जोर के अनुरूप है|
साथ ही, RBI ने बैंकों द्वारा उठाई गई चिंताओं को स्वीकार किया| RBI ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्धारण CIC के पास है, जो जनहित और संभावित व्यावसायिक नुकसान के बीच संतुलन स्थापित करेगा|
इन्फॉर्मेशन कमिश्नर खुशवंत सिंह सेठी ने विस्तृत विचार के लिए मामले को CIC की बड़ी पीठ को भेज दिया है| पीठ यह परखेगी कि निरीक्षण रिपोर्टों, दंड आदेशों और डिफॉल्टर सूचियों जैसे विनियामक दस्तावेजों का RTI प्रावधानों के तहत प्रकटीकरण होना चाहिए या नहीं|
मामला पारदर्शिता और गोपनीयता के बीच संतुलन का आकलन करने से जुड़ा है| यह फैसला भविष्य में बैंकिंग विनियमन से जुड़े प्रकटीकरणों के लिए एक महत्वपूर्ण नज़ीर तय कर सकता है|
RTI एक्ट के तहत NPA और विनियामक रिपोर्टों के प्रकटीकरण पर विवाद ने प्रमुख बैंकों और RBI को कानूनी और नीतिगत बहस के केंद्र में ला दिया है| जहां RBI अधिक पारदर्शिता की वकालत कर रहा है, वहीं बैंकों ने अपने व्यावसायिक हितों को संभावित नुकसान को लेकर चिंता जताई है|
यह मामला बैंकिंग विनियमन में सार्वजनिक जवाबदेही और गोपनीयता के बीच तनाव को रेखांकित करता है| संवेदनशील बैंकिंग जानकारी तक सार्वजनिक पहुंच के भविष्य के दायरे को तय करने में CIC का निर्णय महत्वपूर्ण होगा|
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प्रकाशित:: 13 Jan 2026, 8:42 pm IST

Team Angel One
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