PPAC द्वारा घरेलू उत्पादन और आयात पर डेटा जारी करने के बाद कच्चे तेल की कीमतें केन्द्रित
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नवंबर 2025 में भारत के पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन 23.3 एमएमटी(MMT) रहा, जो पिछले वर्ष से मामूली 0.2% कम है| पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का घरेलू कच्चा तेल उत्पादन नवंबर 2025 में वर्ष-दर-वर्ष 2.6% घटकर 2.3 MMT हो गया| घरेलू उत्पादन में यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों और मांग की रिकवरी के प्रति संवेदनशील बनी हुई हैं|
स्वदेशी उत्पादन कम होने के बावजूद रिफाइनरी थ्रूपुट बढ़ा
भले ही घरेलू कच्चे तेल का उत्पादन घटा, भारतीय रिफाइनरियों द्वारा संसाधित कुल कच्चा तेल नवंबर 2025 में बढ़कर 22.3 MMT हो गया, जो नवंबर 2024 की तुलना में 2.3 % की वृद्धि दर्ज करता है. जहां निजी रिफाइनरों ने 7.3 MMT संसाधित किया, वहीं पीएसयू (PSU) और ज्वाइंट वेंचर रिफाइनरों ने 15.1 MMT संसाधित किया|
कुल संसाधित कच्चे में से:
- स्वदेशी कच्चा तेल: 2.1 MMT
- आयातित कच्चा तेल: 20.2 MMT
आयातित कच्चे पर यह तीव्र निर्भरता बताती है कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें भारत की मुद्रास्फीति, व्यापार संतुलन और राजकोषीय स्थिरता के लिए क्यों एक अहम कारक बनी रहती हैं|
अप्रैल-नवंबर FY26 के दौरान, कुल संसाधित कच्चा तेल साल-दर-साल 2.1 % बढ़ा, जो ईंधन की स्थिर मांग को दर्शाता है|
डीजल और पेट्रोल POL उत्पादन में आगे
उत्पाद-वार आंकड़े दिखाते हैं कि हाई-स्पीड डीजल (HSD) भारत के ईंधन मिश्रण में प्रमुख बना रहा, नवंबर 2025 में कुल POL उत्पादन का 41.5% हिस्सा इसके नाम रहा| इसके बाद रहे:
- मोटर स्पिरिट (पेट्रोल): 18.1%
- नेफ्था: 6.3%
- एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF): 5.8%
- पेटकोक: 5.4%
- एलपीजी(LPG): 4.4%
परिवहन ईंधनों का प्रभुत्व कच्चे तेल की कीमतों को आर्थिक गतिविधि और गतिशीलता रुझानों से क़रीबी रूप से जोड़े रखता है|
भारत में कच्चे तेल के निर्यात-आयात की स्थिति क्या है?
PPAC के आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2025 में कच्चे तेल का आयात 11.1% बढ़ा, जबकि अप्रैल-नवंबर FY26 के दौरान आयात साल-दर-साल 2.4% बढ़ा|
इसके विपरीत, पेट्रोलियम उत्पादों का आयात नवंबर में 8.6% घट गया और अप्रैल-नवंबर FY26 के दौरान 0.6%, मुख्यतः फ्यूल ऑयल, पेट्रोल और पेटकोक के कम आयात के कारण|
दूसरी ओर, पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात नवंबर 2025 में 1.7% घटा, लेकिन अप्रैल-नवंबर FY26 के दौरान 0.4% बढ़ा, जिसका कारण मोटर स्पिरिट, डीजल और नेफ्था के उच्च निर्यात रहे|
निष्कर्ष
ताज़ा PPAC आंकड़े एक परिचित रुझान को रेखांकित करते हैं: घटता घरेलू कच्चा उत्पादन और आयातित तेल पर बढ़ती निर्भरता, जबकि रिफाइनरी गतिविधि और ईंधन की मांग लचीली बनी रहती है| आयात से आने वाले संसाधित कच्चे तेल का 90 % से अधिक होने के साथ, भारत वैश्विक कच्चे तेल कीमतों की अस्थिरता के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना रहता है|
अस्वीकरण : यह ब्लॉग केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है. यहां उल्लिखित सिक्योरिटीज केवल उदाहरण हैं, सिफारिशें नहीं हैं. यह किसी व्यक्तिगत सिफारिश/निवेश सलाह का गठन नहीं करता. इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को निवेश निर्णय लेने के लिए प्रभावित करना नहीं है. प्राप्तकर्ताओं को निवेश निर्णयों पर स्वतंत्र राय बनाने के लिए अपना स्वयं का शोध और मूल्यांकन करना चाहिए.
प्रतिभूति बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं. निवेश करने से पहले संबंधित सभी दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें.
प्रकाशित:: 29 Dec 2025, 4:24 pm IST

Team Angel One
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